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रशपाल कौर: आंखों में रोशनी नहीं, पर 21 साल से सीख रही हैरतअंगेज स्टंट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Jul 2016 09:21 AM IST
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गतका प्लेयर रशपाल कौर प्रोफाइल
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की 38 वर्षीय रशपाल कौर की आंखों की रोशनी ब्रेन ट्यूमर के कारण चली गई थी, लेकिन पिछले 21 साल से वह हैरतअंगेज स्टंट सीख रही है।
गतका प्लेयर रशपाल कौर प्रोफाइल
- फोटो : अमर उजाला
बात हो रही है सिखों के पारंपरिक गेम गतका की। रशपाल कौर सेक्टर 34 के गुरु तेगबहादुर गुरुद्वारा स्थित शहीद बाबा दीप सिंह अखाड़ा में गतका सीख रहीं हैं। वे कहती हैं - ‘मैं 80 सालां दी भी हो जावां पर गतका खेलना नहीं छडांगी।’ एक समय था जब गुरुद्वारा सेक्टर 34 के शहीद बाबा दीप सिंह जी अखाड़ा में कोई लड़की गतका खेलने नहीं आती थी, लेकिन वर्तमान में वहां 12 लड़कियां गतका सीखने रोजाना आ रही हैं। वहां कुलजीत सिंह लड़कियों को गतका की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
गतका प्लेयर रशपाल कौर प्रोफाइल
- फोटो : अमर उजाला
आमतौर पर माना जाता है कि गतका पुरुषों का खेल है। महिलाओं में गतका को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती, लेकिन पिछले कुछ सालों में चंडीगढ़ और मोहाली के कई गुरुद्वारों में गतका सीखने वाली लड़कियां की संख्या बढ़ी है। इसी तरह सेक्टर 40 में शहीद बाबा दीप सिंह गतका अकादमी में कोच नरिंदर सिंह नीना के नेतृत्व में 10 लड़कियां गतका सीख रही हैं। मोहाली केसिंह सभा गुरुद्वारे में सतपाल सिंह बागी 10 लड़कियों को गतका सिखा रहे हैं।
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एलांते मॉल में गतका की दमदार प्रस्तुति
- फोटो : फाइल फोटो
यह है गतका का इतिहास: गतका शब्द फारसी भाषा के शब्द खतका से बना है। जिसका अर्थ है सोटी और सोटी से खेला जाने वाला खेल। पहलेे इसे खतका ही कहा जाता था, बाद में इसे गतका कहा जाने लगा था। गतके के इतिहास की बात की जाए तो सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह ने मीरी पीरी नामक दो तलवारें धारण कर इस खेल को मजबूती प्रदान की। मुगल काल में गरीब व पिछड़ी जाति केलोगों की दशा काफी दयनीय थी। उन्हें शस्त्र रखने की अनुमति नहीं थी। शस्त्र पकड़ने से भी उनके हाथ कांपते थे। किंतु गुरु साहिबान ने इन लोगों को ऐसी कला बख्शी जिसकी गवाही चमकौर की गढ़ी भरती है। गुरु साहिबान द्वारा इस खेल को शुरू करने का केवल एक ही मकसद था कि सिखों को आत्मसुरक्षा केलिए तैयार किया जाए।
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एलांते मॉल में गतका की दमदार प्रस्तुति
- फोटो : फाइल फोटो
इन शस्त्रों का होता है इस्तेमाल: गतके में 39 इंच की सोंटी होती है, जिस पर 3 इंच की मुठ होती है, जिसे आम भाषा में हैंडल कहा जाता है। मुठ केकारण इस सोंटी की कुल लंबाई 42 इंच की हो जाती है। इस सोंटी का भार 500 ग्राम होता है। इस सोंटी को ही गतका कहा जाता है। गतकेमें सोंटी केअलावा बरछा, नेजा, खंडा, जाल, चक्कर ,भाला, कटार और ढाल इत्यादि शस्त्रों का इस्तेमाल किया जाता है। गतका खेल केवल पंजाब या इसके आस पास के क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में भी इसे खेला जाता है। इसकेअलावा विदेशों में भी इस खेल को पसंद किया जाता है। वर्तमान समय में पंजाब में गतका ज्यादातर होला महल्ला के उत्सव पर खेला जाता है। इसकेअलावा पंजाब में किला रायपुर की खेलों में भी यह खेल केरूप में शामिल होता है।