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Vehicle Scrappage: एचएसआरपी बनाने वाली कंपनी बनाएगी 10 वाहन स्क्रैपेज केंद्र, इतने समय में होंगे तैयार
Mon, 16 Oct 2023 01:03 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 16 Oct 2023 01:03 PM IST
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Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
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भारत में वाहनों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट बनाने वाली एजेंसी रोसमेर्टा टेक्नोलॉजीज जल्द ही कम से कम 10 वाहन स्क्रैपिंग सेंटर शुरू करने की योजना बना रही है। एजेंसी ने एलान किया है कि वह अगले तीन वर्षों में इन वाहन स्क्रैपेज केंद्रों को स्थापित करने के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है।
Vehicle Scrapping
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रोसमेर्टा टेक्नोलॉजीज का वर्तमान में भारत में सिर्फ एक परिचालन वाहन स्क्रैपेज केंद्र है। हरियाणा के मानेसर में स्थित, एकमात्र स्क्रैपेज सुविधा में एक वर्ष में लगभग 30,000 वाहनों को स्क्रैप करने की क्षमता है। 10 नई सुविधाओं के आने से, रोसमेर्टा को उम्मीद है कि वाहनों से कबाड़ निकालने की क्षमता हर साल लगभग तीन लाख वाहनों तक बढ़ जाएगी।
रोसमेर्टा टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष कार्तिक नागपाल ने कहा कि नई सुविधाएं सड़क से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को कम करने में योगदान देंगी। नागपाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "इस संबंध में, हम इस स्थिति का लाभ उठाने और सर्कुलर इकोनॉमी में योगदान करने के लिए पूरे भारत में 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहे हैं।"
रोसमेर्टा टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष कार्तिक नागपाल ने कहा कि नई सुविधाएं सड़क से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या को कम करने में योगदान देंगी। नागपाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "इस संबंध में, हम इस स्थिति का लाभ उठाने और सर्कुलर इकोनॉमी में योगदान करने के लिए पूरे भारत में 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहे हैं।"
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वाहन स्कैपिंग नीति का मकसद पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क से हटाना है। इसमें कहा गया है कि 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल कारों और 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को स्क्रैप करने की जरूरत है, जब तक कि मालिक उन्हें सड़क पर रखने के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर लेते।
इस नीति का उद्देश्य न सिर्फ पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना है, बल्कि देश में वाहनों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल की लागत में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बचत करना भी है। इससे एल्युमीनियम, तांबा और रबर जैसी सामग्रियों के आयात पर निर्भरता भी कम हो जाएगी। भारत वर्तमान में हर साल 34.7 अरब डॉलर मूल्य की धातुओं का आयात करता है।
इस नीति का उद्देश्य न सिर्फ पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना है, बल्कि देश में वाहनों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल की लागत में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बचत करना भी है। इससे एल्युमीनियम, तांबा और रबर जैसी सामग्रियों के आयात पर निर्भरता भी कम हो जाएगी। भारत वर्तमान में हर साल 34.7 अरब डॉलर मूल्य की धातुओं का आयात करता है।
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Road transport and highways minister Nitin Gadkari inaugurates vehicle scrapping facility in Nuh district of Haryana
- फोटो : Twitter
भारत में अभी भी 50 लाख से अधिक पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं जिन्हें हटाने की जरूरत है। पुराने वाहनों के स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र की स्क्रैपेज नीति वाहन मालिकों के लिए इंसेंटिव भी प्रदान करती है।
रोसमेर्टा उन निजी एजेंसियों में से एक है जो वाहन स्क्रैपेज केंद्र संचालित करती हैं। एजेंसी के अलावा, टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी जैसे कार निर्माताओं के पास भी पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की अपनी सुविधाएं हैं।
रोसमेर्टा उन निजी एजेंसियों में से एक है जो वाहन स्क्रैपेज केंद्र संचालित करती हैं। एजेंसी के अलावा, टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी जैसे कार निर्माताओं के पास भी पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की अपनी सुविधाएं हैं।