सड़क पर गाड़ी चलाते समय अगर आपके आसपास एंबुलेंस आती है, तो आपको उसका रास्ता तुरंत देना चाहिए। यह न केवल आपके लिए एक जिम्मेदारी है, बल्कि कानून के अनुसार भी एंबुलेंस को रास्ता न देना गंभीर अपराध है। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी गाड़ी के आगे एंबुलेंस को देख कर भी उसे रास्ता नहीं देते, जिससे ना केवल यातायात में रुकावट आती है, बल्कि यह किसी की जान के लिए भी खतरा बन सकता है। आइए जानते हैं कि एंबुलेंस को रास्ता न देने पर क्या होते हैं इसके नतीजे और आप पर कितना जुर्माना लग सकता है।
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जाम में फंसी एम्बुलेंस
- फोटो : Amar Ujala
क्या कहता है मोटर वाहन अधिनियम?
भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत सड़क पर चलते समय एंबुलेंस को रास्ता देना जरूरी है। यह एक कानून है जिसे अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर नहीं माना तो उसे सजा का सामना करना पड़ सकता है। एंबुलेंस का प्रमुख उद्देश्य किसी मरीज को जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाना होता है और अगर उसे रास्ता नहीं मिलता तो यह किसी की जान के लिए खतरे का कारण बन सकता है।
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एंबुलेंस को रास्ता न देने पर जुर्माना लग सकता है.
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने पर क्या होगा?
अगर आप ड्राइविंग के दौरान एंबुलेंस को रास्ता नहीं देते हैं और जानबूझकर उसकी गति को रोकते हैं, तो इस पर जुर्माने के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मामला गंभीर हो तो आपको जेल की सजा भी हो सकती है।
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10,000 रुपये का कट सकता है चालान.
- फोटो : अमर उजाला
यदि कोई व्यक्ति एंबुलेंस को रास्ता नहीं देता, तो उस पर ₹10,000 का चालान कट सकता है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार इस अपराध को करता है, तो उस पर 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है। यह सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
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अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें.
- फोटो : अमर उजाला
क्यों जरूरी है यह नियम
एंबुलेंस में अक्सर गंभीर रूप से बीमार या घायल व्यक्ति होता है। यदि इसे रास्ता नहीं मिलता, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। यह नियम इस कारण से महत्वपूर्ण है ताकि जीवन रक्षकसेवाएं समय पर मरीज तक पहुंच सकें।