Maruti Suzuki 800 की गिनती आज भी दिग्गज कारों में होती है। हालांकि दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाली इस कार को काफी पहले ही बंद कर दिया गया था। लेकिन कार के चाहने वाले आज भी देशभर में इसे मॉडिफाई कराकर अपनी गैरेज का हिस्सा बनाए हुए हैं। वहीं इस कार को एक बार फिर मॉडिफाई किया गया है। हालांकि मजे के लिए किया गया यह संशोधन कानूनी रूप से सही नहीं है।
तीन पहियों पर चलती है ये Maruti 800, इस कार का यह अवतार आपने कभी नहीं देखा होगा
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मोटर साइकिल का लगाया पहिया
बता दें कि इस कार को MAGNETO 11 द्वारा मॉडिफाई किया गया है। इससे पहले भी इन्होंने कई कारों को मॉडिफाई किया है। कार को कैसे मॉडिफाई किया गया है इस पूरी प्रक्रिया को एक वीडियो में भी दिखाया गया है। इस कार को पहले कटर से आधा काटा गया है। उसके बाद इसमें पीछे एक मोटरसाइकिल का टायर जोड़ा गया है। यानी चार पहिया मारुति सुजुकी को तीन पहिया का बना दिया गया है।
तीन पहियों पर दौड़ी कार
वीडियो में देखने में लग रहा है कि इस चार पहिया वाहन को तीन पहिया बनाने में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं लगी है। वहीं इस कार को चलाने में भी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आ रही है। वीडियो में चालक इस गाड़ी को स्पीड के साथ आगे और पीछे करता दिखाई दे रहा है। वह आसानी से कार को ड्राइव कर रहा है। हालांकि यह मॉडिफिकेशन गैरकानूनी है। क्योंकि इस कार के स्वरूप को बिल्कुल बदल दिया गया है। इसकी बनावट बिल्कुल भी कानूनी नहीं है इसलिए वाहन नियमों का पालन नहीं करने पर इसे पुलिस द्वारा जब्त किया जा सकता है।
मिनी कार बनाने की योजना
कार को बनाने वाले व्यक्ति का कहना है कि यह कार अभी फाइनल रूप से डिजाइन नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि उनकी योजना एक मिनी मारुति 800 कार बनाने की है। इसे अभी अपडेट करना बाकी है। यह कार वैसे ही रहेगी बस इसका साइज छोटा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक जो कार में हुआ है वह सिर्फ मौज के लिए था। जैसा कि आजकल टिकटॉक आदि पर दिखाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि गाड़ी पूरी तरह से कब तैयार होगी, अभी इसका कुछ पता नहीं है क्योंकि वह पहले से ही कई गाड़ियों पर काम कर रहे हैं।
लंबी है प्रक्रिया
बता दें कि अगर आप किसी कार को इस तरह से मॉडिफाई कराकर वैध बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजना पड़ता है। इसके लिए एआरएआई या आईसीएटी द्वारा परीक्षण करवाना जरूरी होता है। वहीं इसके बाद आरटीओ द्वारा इसका पंजीकरण कराया जाता है। यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें समय और धन काफी खर्च होता है।