साल 2020 की शुरुआत होने वाली है। इसके साथ ही देश की ऑटो इंडस्ट्री को BS4 उत्सर्जन मानकों से BS6 नए मानकों में शिफ्ट होने में मात्र तीन महीने ही शेष हैं। कंपनियों ने भी नए मानकों के मुताबिक अपनी गाड़ियों को अपग्रेड करना भी शुरू कर दिया है। वहीं इस शिफ्टिंग से ग्राहक थोड़े भ्रामक हैं, वहीं इसका फायदा सेकंड हैंड कार बाजार को मिल रहा है।
BS4 और BS6 कारों को लेकर असमंजस में हैं ग्राहक, इन पुरानी कारों में ले रहे हैं दिलचस्पी!
42 लाख कारों की बिक्री
सेकंड हैंड कार बाजार को नए साल से बेहद उम्मीदें हैं। सेकेंड हैंड कार बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि नई साल 2020 में भी कारों की बिक्री की रफ्तार दो अंकों में होगी। इस समय ऑटोमोबाइल कंपनियां ईयर एंड को भुनाने में जुटी हुई हैं। नई कारों पर इन दिनों कंपनियां जबरदस्त डिस्काउंट दे रही हैं। वहीं देश के सेकंड हैंड कार बाजार में 12 फीसदी का उछाल आया है। 2019 में 42 लाख कारों की बिक्री हुई, जो 2020 में 15 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।
सबसे ज्यादा डिस्काउंट बीएस4 गाड़ियों पर
ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा डिस्काउंट बीएस4 गाड़ियों पर मिल रहा है। वहीं पेट्रोल इंजन वाले बीएस6 मॉडल्स की कीमत 10 से 50 हजार रुपये तक ज्यादा हैं। जबकि डीजल मॉडल्स वाली गाड़ियां 50 हजार से एक लाख रुपये तक महंगी हैं। वहीं अगले साल से कंपनियां पहले ही कीमतें बढ़ाने का एलान कर चुकी हैं। जिसके बाद बीएस4 गाड़ियों के मुकाबले बीएस6 गाड़ियां 20 फीसदी तक महंगी हो जाएंगी।
तीन साल से पहले कर रहे अपग्रेड
सेकंड हैंड कार बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि बीएस4 कारों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। इससे शिफ्ट से न केवल बाजार में नए मॉडल्स की सप्लाई बढ़ेगी, साथ ही ग्राहक भी तीन साल से कम वक्त में कारों को अपग्रेड करने की तैयारी करेंगे। यह बदलाव सभी कैटेगरीज जैसे हैचबैक और एसयूवी सेगमेंट में भी देखने को मिलेगा।
सैंट्रो जिंग की मांग में कमी
यूज्ड कार मार्केट से जुडे लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा बदलाव एसयूवी सेगमेंट में होगा। इस बदलाव का असर यह होगा कि पुराने वेरिएंट्स को टियर -3, टियर -4 शहरों में धकेला जाएगा। ऑनलाइन बिक्री साइट ओएलएक्स से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नई कारों के वेरियंट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए पुरानी पीढ़ी की सैंट्रो जिंग की मांग में 26 फीसदी की कमी आई है, जबकि मारुति बलेनो की मांग में 26 फीसदी का इजाफा हुआ है।