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CAFE:महिंद्रा, ह्यूंदै समेत 8 कार निर्माताओं पर लग सकता है ₹7,300 करोड़ का उत्सर्जन जुर्माना, रिपोर्ट में दावा
Thu, 28 Nov 2024 02:02 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 28 Nov 2024 02:02 PM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार, कार निर्माताओं द्वारा निर्मित मॉडल पहले लागू किए गए सख्त CAFE मानदंडों का पालन नहीं करते हैं।
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Car Pollution
- फोटो : Freepik
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भारत में ह्यूंदै मोटर, महिंद्रा, किआ और होंडा कार्स जैसी प्रमुख कार निर्माता कंपनियों को वित्त वर्ष 2022-23 में फ्लीट एमिशन लेवल (फ्लीट उत्सर्जन स्तर) का अनुपालन न करने पर भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार निर्माता कंपनियों को कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) (CAFE) मानकों को हासिल करने में नाकाम रहने के कारण 7,300 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। CAFE मानकों को वर्ष 2022 में कड़ा कर दिया गया था। इन आठ कार निर्माताओं पर उत्सर्जन जुर्माना लागू करने का अंतिम फैसला अभी लिया जाना बाकी है। क्योंकि सभी हितधारकों के बीच चर्चा चल रही है।
Car
- फोटो : AdobeStock
रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का उत्तरी हिस्सा, खास तौर पर दिल्ली और उसके आस-पास के इलाके, गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं और AQI का स्तर गंभीर से गंभीर प्लस श्रेणी में पहुंच गया है। अधिकारियों ने प्रदूषण को कम करने के लिए वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। जिसमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों को अगले आदेश तक सड़कों पर चलने से प्रतिबंधित करना शामिल है। रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत तब तक प्रदूषण को कम नहीं कर सकता जब तक कि पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम नहीं हो जाती।
Hyundai Car
- फोटो : Hyundai
कौन कितना जुर्माना करेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, तीन प्रमुख कार निर्माता ह्यूंदै, महिंद्रा और किआ को लगभग 7,300 करोड़ रुपये के उत्सर्जन जुर्माने का बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ सकता है। ह्यूंदै को सबसे अधिक लगभग 2,837 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है, जो वित्त वर्ष 2023 में उसके वार्षिक लाभ का लगभग 60 प्रतिशत है। महिंद्रा को भी 1,788 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि एक अन्य कोरियाई ऑटो दिग्गज किआ को लगभग 1,346 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। उत्सर्जन जुर्माने को दो स्लैब में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक के लिए 10 लाख रुपये का निश्चित जुर्माना और वित्तीय वर्ष के दौरान निर्मित प्रत्येक वाहन के लिए 50,000 रुपये या 25,000 रुपये का जुर्माना है।
रिपोर्ट के अनुसार, तीन प्रमुख कार निर्माता ह्यूंदै, महिंद्रा और किआ को लगभग 7,300 करोड़ रुपये के उत्सर्जन जुर्माने का बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ सकता है। ह्यूंदै को सबसे अधिक लगभग 2,837 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है, जो वित्त वर्ष 2023 में उसके वार्षिक लाभ का लगभग 60 प्रतिशत है। महिंद्रा को भी 1,788 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि एक अन्य कोरियाई ऑटो दिग्गज किआ को लगभग 1,346 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। उत्सर्जन जुर्माने को दो स्लैब में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक के लिए 10 लाख रुपये का निश्चित जुर्माना और वित्तीय वर्ष के दौरान निर्मित प्रत्येक वाहन के लिए 50,000 रुपये या 25,000 रुपये का जुर्माना है।
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Mahindra SUV
- फोटो : Mahindra
CAFE मानदंड उत्सर्जन दंड: कार निर्माताओं की आपत्ति
किसी भी कार निर्माता ने उत्सर्जन दंड के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कार निर्माताओं ने केंद्र से पूरे वित्तीय वर्ष में निर्मित वाहनों पर नए CAFE मानदंडों को लागू करने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा करना अनुचित होगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा निर्धारित नए CAFE मानदंड 2022 में पेश किए गए थे, लेकिन पिछले साल जनवरी से लागू किए गए थे। केंद्र ने अभी तक वित्त वर्ष 2022-23 के लिए CAFE मानदंड रिपोर्ट जारी नहीं की है। और कार निर्माताओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बीच अधिक स्पष्टता हासिल करने के लिए हितधारकों के बीच चर्चा चल रही है।
किसी भी कार निर्माता ने उत्सर्जन दंड के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कार निर्माताओं ने केंद्र से पूरे वित्तीय वर्ष में निर्मित वाहनों पर नए CAFE मानदंडों को लागू करने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा करना अनुचित होगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा निर्धारित नए CAFE मानदंड 2022 में पेश किए गए थे, लेकिन पिछले साल जनवरी से लागू किए गए थे। केंद्र ने अभी तक वित्त वर्ष 2022-23 के लिए CAFE मानदंड रिपोर्ट जारी नहीं की है। और कार निर्माताओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बीच अधिक स्पष्टता हासिल करने के लिए हितधारकों के बीच चर्चा चल रही है।
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Kia Car
- फोटो : Kia India
CAFE मानदंड क्या है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि आठ कार निर्माता, जिनमें स्कोडा, रेनो, निसान मोटर और फोर्स मोटर्स जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, पिछले वित्तीय वर्ष में CAFE मानदंडों का पालन करने में असफल रही हैं। CAFE मानदंड, जिन्हें पहली बार भारत में 2017 में पेश किया गया था, नियमों का एक समूह है जो एक वित्तीय वर्ष में कार निर्माता के बेड़े द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को सीमित करता है। नियमों को 2022 में संशोधित किया गया और सख्त मानदंड लागू किए गए। इसमें कहा गया है कि सभी बेड़े में प्रति 100 किलोमीटर पर 4.78 लीटर से अधिक ईंधन की खपत नहीं होनी चाहिए और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 113 ग्राम प्रति किलोमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आठ कार निर्माता, जिनमें स्कोडा, रेनो, निसान मोटर और फोर्स मोटर्स जैसी कंपनियां भी शामिल हैं, पिछले वित्तीय वर्ष में CAFE मानदंडों का पालन करने में असफल रही हैं। CAFE मानदंड, जिन्हें पहली बार भारत में 2017 में पेश किया गया था, नियमों का एक समूह है जो एक वित्तीय वर्ष में कार निर्माता के बेड़े द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को सीमित करता है। नियमों को 2022 में संशोधित किया गया और सख्त मानदंड लागू किए गए। इसमें कहा गया है कि सभी बेड़े में प्रति 100 किलोमीटर पर 4.78 लीटर से अधिक ईंधन की खपत नहीं होनी चाहिए और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 113 ग्राम प्रति किलोमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।