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EV Battery: ईवी मालिकों को जल्द मिलेगा 'बैटरी पासपोर्ट', एक स्कैन में मिलेगी बैटरी की पूरी जानकारी
Wed, 30 Jul 2025 04:52 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 30 Jul 2025 04:52 PM IST
सार
अब इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) मालिकों को जल्द ही अपनी गाड़ी की बैटरी से जुड़ी हर जरूरी जानकारी सिर्फ एक स्कैन में मिल सकेगी। सरकार एक "बैटरी पासपोर्ट" सिस्टम लाने जा रही है, जिसके तहत हर बैटरी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
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Electric Car Charging
- फोटो : Freepik
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अब इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) मालिकों को जल्द ही अपनी गाड़ी की बैटरी से जुड़ी हर जरूरी जानकारी सिर्फ एक स्कैन में मिल सकेगी। सरकार एक "बैटरी पासपोर्ट" सिस्टम लाने जा रही है, जिसके तहत हर बैटरी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस रिकॉर्ड में बैटरी की सोर्स, रचना (कंपोजिशन), परफॉर्मेंस, जीवनकाल (लाइफसाइकिल) और सप्लाई चेन जैसी जानकारी दर्ज होगी। ये सारी जानकारी एक यूनिक QR (क्यूआर) कोड में एम्बेड की जाएगी। जिसे स्कैन कर कोई भी इन डिटेल्स को देख सकेगा।
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- फोटो : Freepik
नीति आयोग और मंत्रालयों के बीच चल रही बातचीत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग इस फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी विभागों से बातचीत कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि बैटरी पासपोर्ट एक तरह से हर बैटरी का 'आधार कार्ड' होगा। जिसमें हर बैटरी की यूनिक आईडी होगी और उस आईडी से उसकी पूरी जानकारी हासिल की जा सकेगी।
यह भी पढ़ें - Traffic Rules: ड्राइविंग लाइसेंस रद्द नहीं कर सकती पुलिस, कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग इस फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी विभागों से बातचीत कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि बैटरी पासपोर्ट एक तरह से हर बैटरी का 'आधार कार्ड' होगा। जिसमें हर बैटरी की यूनिक आईडी होगी और उस आईडी से उसकी पूरी जानकारी हासिल की जा सकेगी।
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सेफ्टी, क्वालिटी और एक्सपोर्ट - तीनों में मिलेगा फायदा
इस पहल से इलेक्ट्रिक वाहन की सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों में सुधार होगा। इसके साथ ही भारत से ईवी के एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार पहले से ही कई ग्लोबल ईवी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए इंसेंटिव दे रही है। जिससे भारत ईवी प्रोडक्शन का वैश्विक केंद्र (ग्लोबल हब) बन सके।
यह भी पढ़ें - Ride Booking App: महाराष्ट्र सरकार लॉन्च करेगी कैब, ऑटो और ई-बाइक बुकिंग एप, क्या सस्ती होंगी राइड्स?
बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी में निभाएगा अहम रोल
बैटरी पासपोर्ट सिस्टम आने वाले समय में लागू होने वाली बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के लिए भी बेहद अहम होगा। इसमें यूजर्स क्यूआर कोड स्कैन करके यह जान पाएंगे कि बैटरी की उम्र कितनी है, इसकी बनावट कैसी है और इसकी परफॉर्मेंस कैसी रही है।
यह भी पढ़ें - EV Battery: टेस्ला ने एलजीईएस के साथ किया 4.3 अरब डॉलर का बैटरी सौदा, चीन पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
इस पहल से इलेक्ट्रिक वाहन की सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों में सुधार होगा। इसके साथ ही भारत से ईवी के एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार पहले से ही कई ग्लोबल ईवी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए इंसेंटिव दे रही है। जिससे भारत ईवी प्रोडक्शन का वैश्विक केंद्र (ग्लोबल हब) बन सके।
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बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी में निभाएगा अहम रोल
बैटरी पासपोर्ट सिस्टम आने वाले समय में लागू होने वाली बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के लिए भी बेहद अहम होगा। इसमें यूजर्स क्यूआर कोड स्कैन करके यह जान पाएंगे कि बैटरी की उम्र कितनी है, इसकी बनावट कैसी है और इसकी परफॉर्मेंस कैसी रही है।
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पुरानी और नई सेल्स को एक साथ जोड़ना बन सकता है खतरा
इस सिस्टम की जरूरत तब महसूस हुई जब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और कारों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि कुछ कंपनियां अलग-अलग वर्षों में बनी बैटरी सेल्स को एक ही मॉड्यूल में जोड़कर इस्तेमाल कर रही थीं। इससे नया सेल ज्यादा लोड झेलता है, क्योंकि पुराने सेल अपनी लाइफ के अंतिम चरण में होते हैं। इससे बैटरी की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है और सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
यह भी पढ़ें - Bengaluru-Chennai Expressway: बंगलूरू-चेन्नई एक्सप्रेसवे पर नए टोल रेट का एलान, जानें कितना देना होगा शुल्क
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हर बैटरी में एक ही साल की सेल्स हो सकेंगी इस्तेमाल
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि बैटरी पासपोर्ट लागू होने के बाद यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी बैटरी में एक ही साल में बनी सेल्स का इस्तेमाल हो। इसके जरिए यूजर्स को यह जानने में आसानी होगी कि बैटरी कितने समय तक चलेगी और उसकी परफॉर्मेंस कैसी होगी। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बैटरियां ईवी की कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होती हैं।
यह भी पढ़ें - EV Subsidy: ईवी, हाइब्रिड या पेट्रोल-डीजल? वाहन उत्सर्जन पर बहस के बीच नीति आयोग कर रहा है सबसे साफ तकनीक की जांच
सरकार की योजना से मिलेंगे तीन बड़े फायदे
इस पूरे सिस्टम का उद्देश्य तीन बड़े फायदे हासिल करना है - निर्यात (व्यापार), सुरक्षा और गुणवत्ता। ये तीनों ही भारत को ग्लोबल ईवी मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे।
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सरकारी अधिकारियों ने बताया कि बैटरी पासपोर्ट लागू होने के बाद यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी बैटरी में एक ही साल में बनी सेल्स का इस्तेमाल हो। इसके जरिए यूजर्स को यह जानने में आसानी होगी कि बैटरी कितने समय तक चलेगी और उसकी परफॉर्मेंस कैसी होगी। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बैटरियां ईवी की कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होती हैं।
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सरकार की योजना से मिलेंगे तीन बड़े फायदे
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