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New Vehicles: 2050 तक भारत में वाहनों की संख्या में होगी दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी! रिपोर्ट में बताई वजह
Tue, 17 Jun 2025 05:44 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 17 Jun 2025 05:44 PM IST
सार
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में देश में कुल 22.6 करोड़ वाहन थे, लेकिन 2050 तक ये आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 करोड़ हो सकता है।
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Delhi Traffic
- फोटो : PTI
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भारत में अगले 25 वर्षों में वाहनों की संख्या में जबरदस्त इजाफा होने वाला है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में देश में कुल 22.6 करोड़ वाहन थे, लेकिन 2050 तक ये आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 करोड़ हो सकता है। इस जबरदस्त बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह दोपहिया और निजी कारों की बढ़ती संख्या मानी जा रही है। जिससे ईंधन की मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और शहरी परिवहन से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ेंगी।
स्कूटी-बाइक
- फोटो : Adobe Stock
दोपहिया वाहन रहेंगे सबसे आगे
रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक दोपहिया वाहन भारत के कुल वाहन स्टॉक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बन जाएंगे। यानी करीब 35 करोड़ दोपहिया वाहन सड़कों पर होंगे। इसके अलावा, निजी कारों की संख्या भी लगभग तीन गुना बढ़कर 9 करोड़ के आसपास पहुंच सकती है।
इतनी भारी संख्या में वाहनों का इजाफा पहले से ही भीड़भाड़, प्रदूषण और खराब बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे शहरों पर और दबाव डाल सकता है।
यह भी पढ़ें - Mercedes-Benz EQS 580 4MATIC: मर्सिडीज-बेंज ने भारत में लॉन्च किया EQS 580 4MATIC का 'सेलिब्रेशन एडिशन', जानें क्या है खास
रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक दोपहिया वाहन भारत के कुल वाहन स्टॉक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बन जाएंगे। यानी करीब 35 करोड़ दोपहिया वाहन सड़कों पर होंगे। इसके अलावा, निजी कारों की संख्या भी लगभग तीन गुना बढ़कर 9 करोड़ के आसपास पहुंच सकती है।
इतनी भारी संख्या में वाहनों का इजाफा पहले से ही भीड़भाड़, प्रदूषण और खराब बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे शहरों पर और दबाव डाल सकता है।
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Traffic jam after rain in Delhi
- फोटो : PTI
उत्तर और पश्चिम भारत में बढ़ेगा दबदबा
वाहनों की यह बढ़त पूरे देश में समान नहीं होगी। इस बढ़ोतरी का ज्यादातर हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में देखने को मिलेगा। खास तौर पर उत्तर प्रदेश अकेले ही 2050 तक 9 करोड़ से ज्यादा वाहनों का गवाह बन सकता है।
वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के कारण वहां वाहन वृद्धि की गति थोड़ी थम सकती है।
दिल्ली, बंगलूरू, पुणे, ठाणे और अहमदाबाद जैसे शहरी और अर्ध-शहरी केंद्र वाहन स्वामित्व के बड़े हब बने रहेंगे। अनुमान है कि सिर्फ ये कुछ शहर ही देश की कुल वाहन संख्या का 10 प्रतिशत हिस्सा हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें - 2025 Honda Transalp XL750: नई 2025 होंडा ट्रांसएल्प XL750 भारत में लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
वाहनों की यह बढ़त पूरे देश में समान नहीं होगी। इस बढ़ोतरी का ज्यादातर हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में देखने को मिलेगा। खास तौर पर उत्तर प्रदेश अकेले ही 2050 तक 9 करोड़ से ज्यादा वाहनों का गवाह बन सकता है।
वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के कारण वहां वाहन वृद्धि की गति थोड़ी थम सकती है।
दिल्ली, बंगलूरू, पुणे, ठाणे और अहमदाबाद जैसे शहरी और अर्ध-शहरी केंद्र वाहन स्वामित्व के बड़े हब बने रहेंगे। अनुमान है कि सिर्फ ये कुछ शहर ही देश की कुल वाहन संख्या का 10 प्रतिशत हिस्सा हो सकते हैं।
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Ampere Nexus Electric Scooter
- फोटो : Greaves Electric
इलेक्ट्रिक दोपहिया: सस्ता और बेहतर विकल्प
रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि आज के समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन चलाने में पेट्रोल वाहनों से काफी सस्ते हैं। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिक स्कूटर की चलने की लागत करीब 1.48 रुपये प्रति किमी है। जबकि पेट्रोल स्कूटर की लागत 2.46 रुपये प्रति किमी पड़ती है। वहीं, इलेक्ट्रिक तिपहिया की लागत सिर्फ 1.28 रुपये प्रति किमी है, जबकि पेट्रोल तिपहिया की लागत 3.21 रुपये प्रति किमी आती है।
निजी कार और टैक्सी सेगमेंट में भी इलेक्ट्रिक वाहन धीरे-धीरे मुकाबले में आ रहे हैं। हालांकि, इनकी लागत पर असर राज्य सरकारों की ईवी सब्सिडी, चार्जिंग दरों और खरीदने की शुरुआती कीमत पर निर्भर करता है। जिन राज्यों में ईवी नीति मजबूत है, वहां इलेक्ट्रिक कारें सस्ती पड़ सकती हैं। लेकिन पूरे देश में इसका आर्थिक फायदा एक जैसा नहीं है।
यह भी पढ़ें - Citroen C3 Sport Edition: सिट्रोएन सी3 स्पोर्ट एडिशन भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या है खास
रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि आज के समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन चलाने में पेट्रोल वाहनों से काफी सस्ते हैं। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिक स्कूटर की चलने की लागत करीब 1.48 रुपये प्रति किमी है। जबकि पेट्रोल स्कूटर की लागत 2.46 रुपये प्रति किमी पड़ती है। वहीं, इलेक्ट्रिक तिपहिया की लागत सिर्फ 1.28 रुपये प्रति किमी है, जबकि पेट्रोल तिपहिया की लागत 3.21 रुपये प्रति किमी आती है।
निजी कार और टैक्सी सेगमेंट में भी इलेक्ट्रिक वाहन धीरे-धीरे मुकाबले में आ रहे हैं। हालांकि, इनकी लागत पर असर राज्य सरकारों की ईवी सब्सिडी, चार्जिंग दरों और खरीदने की शुरुआती कीमत पर निर्भर करता है। जिन राज्यों में ईवी नीति मजबूत है, वहां इलेक्ट्रिक कारें सस्ती पड़ सकती हैं। लेकिन पूरे देश में इसका आर्थिक फायदा एक जैसा नहीं है।
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Traffic Jam
- फोटो : PTI
कॉमर्शियल ट्रांसपोर्ट अब भी जीवाश्म ईंधन पर निर्भर
जहां छोटी गाड़ियों में इलेक्ट्रिक वाहन सस्ता पड़ता है। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक और बसें अभी भी डीजल, सीएनजी या एलएनजी वाहनों से काफी महंगे हैं। मध्यम और भारी कमर्शियल वाहनों के लिए एलएनजी को 2040 तक सबसे सस्ता विकल्प माना जा रहा है।
अगर ईवी तकनीक सस्ती नहीं हुई और चार्जिंग ढांचा मजबूत नहीं बना, तो 2040 के दशक तक कॉमर्शियल गाड़ियों में डीजल का इस्तेमाल जारी रहेगा। अगर मौजूदा स्थिति बनी रही, तो इस अध्ययन के अनुसार डीजल की मांग 2047 में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगी, जबकि पेट्रोल की मांग 2032 के आसपास स्थिर हो सकती है।
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अगर ईवी तकनीक सस्ती नहीं हुई और चार्जिंग ढांचा मजबूत नहीं बना, तो 2040 के दशक तक कॉमर्शियल गाड़ियों में डीजल का इस्तेमाल जारी रहेगा। अगर मौजूदा स्थिति बनी रही, तो इस अध्ययन के अनुसार डीजल की मांग 2047 में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगी, जबकि पेट्रोल की मांग 2032 के आसपास स्थिर हो सकती है।
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