आजकल हर महीने एक से बढ़कर एक कारें लॉन्च हो रही हैं, जिन्हें देखकर इन्हें खरीदने का मन करने लगता है। लोग कई बार लुक और फीचर्स से प्रभावित होकर किसी ऐसी कार को खरीद लेते हैं जो उनके बजट से बाहर होती है। ऐसे में कार की महंगी ईएमआई से वो परेशान होने लगते हैं और सोचने लगते हैं कि कितनी जल्दी इससे छुटकारा मिल जाए। कार खरीदने का एक गलत फैसला आपका सारा बजट बिगाड़ सकता है, इसलिए आपको ये जान लेना चाहिए कि आपनी सैलरी के मुताबिक कितनी महंगी कार खरीदनी चाहिए।
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कार खरीदते समय सैलरी का रखें ध्यान
- फोटो : Adobe Stock
कार खरीदते समय सैलरी का रखें ध्यान
अगर आप कार खरीदने के बाद महंगी ईएमआई के झंझट से बचना चाहते हैं, तो आपको सैलरी के हिसाब से सही बजट की कार खरीदने की जानकारी होनी चाहिए। अगर आप भी इस सोच में हैं कि अपनी सैलरी में कितने बजट वाली कार खरीदना बेहतर सौदा होगा, तो यहां हम आपका कन्फ्यूजन दूर करेंगे। यहां हम आपको एक ऐसा फॉर्मूला बताने जा रहे हैं जिससे आपका कार खरीदने का बजट कभी नहीं बिगड़ेगा। आइए जानते हैं।
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कितने बजट की होनी चाहिए कार
- फोटो : Tata Motors
सालाना पैकेज के आधे बजट की होनी चाहिए कार
कार खरीदने से पहले याद रखें कि आपकी कार की ऑन-रोड कीमत आपके सालाना सैलरी से आधी कीमत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। मान लीजिए कि आपका पैकेज 10 लाख का है तो कार 5 लाख तक की, 15 लाख का है तो 7.5 लाख तक की और 20 लाख का है तो 10 लाख तक की कार खरीदना आपके बजट पर बोझ नहीं डालेगा। यहां कार के बजट से मतलब ऑन-रोड कीमत से है। इसके अलावा कार खरीदते समय भी आपको डाउन पेमेंट, लोन अमाउंट और ईएमआई का कैलकुलेशन का भी ध्यान रखना चाहिए।
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आपनाए ये फॉर्मूला
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कार के बजट के लिए आपनाए ये फॉर्मूला
कार खरीदते समय 20/4/10 फॉर्मूला बहुत काम आता है। इसमें 20 यानी कि 20 फीसदी डाउनमेंट है, यानी कि आपकी कार की डाउनपेमेंट आपकी सालाना सैलरी के 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा फॉर्मूले में 4 का मतलब 4 साल से है, यानी कि लोन की अवधि 4 साल से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए.
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4 साल से ज्यादा का नहीं हो लोन
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आखिर में 10 का मतलब है कि 10%, यानी कि ईएमआई की राशि सालाना सैलरी के 10 फीसदी हिस्से से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आप इस फॉर्मूले के अनुसार कार खरीदेंगे तो आपको कभी भी बजट की दिक्कत नहीं आएगी।