चीन ने भारत के पूर्वी लद्दाख के कई हिस्सों में कब्जा जमा रखा है। पैंगोंस त्सो, डेपसोंग, गलवां वैली, हॉट स्प्रिंग, कोयुल और फुक्शे में चीन आगे आकर बैठ गया है। वहीं डराने धमकाने का उसका पुराना प्रोपेगेंडा चालू है। तिब्बत के पठार में हाई एल्टीट्यूड एरिया में चीनी हथियारों के वीडियोज भी डालता रहता है। लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इनमें से ज्यादातर सैन्य वाहन, हवाईजहाज और हेलीकॉप्टर्स तक नकल करके बनाए हैं। आइए जानते हैं चीन के कुछ नकलची सैन्य वाहनों के बारे में...
चीन अपने इन नकलची हथियारों के दम पर देता है भारत को गीदड़भभकी! जानिए इनकी असलियत
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टाइप-15 Vs British L7
चीनी सेना लंबे समय से पहाड़ों पर जंग करने के लिए हल्के टैंकों पर काम रही थी। चीनी सेना ने कुछ साल पहले ही हल्की बॉडी वाले जंगी टैंक टाइप-15 को अपनी सेना में शामिल किया है। इसे हाल ही में दक्षिण-पश्चिम तिब्बत के पठारों में भी युद्धाभ्यास के दौरान देखा गया था। लेकिन यह टैंक असल में ब्रिटिश एल7 गन जैसा दिखता है, जिसका लाइसेंस चीन को 1980 के दशक में दिया गया था। टी-15 में 1000 एचपी का डीजल इंजन लगा है। माना जा रहा है कि भारत से तनातनी को देखते हुए चीन ने यह टैंक बनाया है और आम 50 टन वाले टैंकों के मुकाबले इसका वजन मात्र 30 टन है।
QN-506 Vs BMPT-72 टर्मिनेटर टैंक
रूस अपने इस टैंक पर बेहद नाज करता है। 1970 के T-72 जैसी हैवी आर्म्ड चैसिस पर बने इस टैंक में 32 एमएम की तोप लगी है, चार लेजर गाइडेड अटाका-टी एंटी टैंक मिसाइल्स और मशीन गन लगी है। इसकी 32 एमएम की तोप दुश्मन के जहाज को लगभग चार किमी पहले ही मार गिराने में सक्षम है। वहीं चीन ने किसी तरह से जुगाड़ करके रूस के इस टैंक की कापी हासिल कर ली और QN-506 तैयार कर लिया। जिसे हाल में चीनी डिफेंस ट्रेड शो में पेश किया गया था। हालांकि चीन का ये टैंक एम1 अब्राम्स या टी-80 की तरह मुख्य जंगी टैंक नहीं है, इसे कॉम्बैट सपोर्ट व्हीकल्स की तरह बनाया है।
अमेरिकी ब्लैकहॉक VS हार्बिन Z-20
अमेरिका की तमाम पेटेंट लेटेस्ट मिलिट्री टेक्नोलॉजी के क्लोन तैयार करने के बाद चीन ने अमेरिकी के प्रसिद्ध सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का क्लोन तैयार किया है। चीनी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का नाम हार्बिन Z-20 है और चीनी सेना को सौंप दिया गया है। Z-20 कम-ऑक्सीजन वाले इलाके में भी उड़ान भर सकता है और इसमें एक्टिव वाइब्रेशन कंट्रोल, फ्लाई-बाई-वायर, लो नॉयज रोटर डिजाइन जैसे फीचर भी दिए गए हैं। इसमें एडवांस फ्लाई-बाई-वायर टेक्नोलॉजी भी है, कुछ ही देशों के पास है। चीनी सेना के पास यह अकेला मल्टी रोल कैपेबिलिटी वाला चॉपर है। बताते हैं कि कि पाकिस्तान ने ही चीन को इस हेलीकॉप्टर का एक्सेस दिया था। 2011 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने जब अल-कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए रेड की थी, तब उनका एक सीकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर क्रेश हो गया था।
Chengdu J-10 Vs U.S. F-16
1980 के दशक में अमेरिका ने इजराइल के साथ मिल कर एक जंगी लड़ाकूविमान बनाने का कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन वित्तीय वजहों से बाद में अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए। बाद में इजराइल ने ‘लावी’ फाइटरजेट की जानकारी को चीन को बेच दिया। इस तरह चीन के हाथों अमेरिकी F-16 जानकारियां हाथ लग गईं और चीन ने J-10 फाइटरजेट त्यैर कर लिया, जिसे 2017 में चीनी सेना को सौंपा गया।