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ऑटो सेक्टर ने 2020 से लगाईं आशाएं, 2019 को नहीं रखना चाहेगा याद

Mon, 30 Dec 2019 05:42 AM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 30 Dec 2019 05:42 AM IST
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auto sector slowdown india reasons recession in india automobile industry 2019 hopes in 2020
automobile sector - फोटो : Social
भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए साल 2019 का समय ऐसा बीता जिसे इंडस्ट्री याद रखना नहीं चाहेगी। इस पूरे साल ऑटो इंडस्ट्री में सुस्ती छाई रही और गाड़ियों की बिक्री अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि सरकार ने इस स्थिति को काबू करने के लिए कुछ कदम उठाए और आश्वासन भी दिए। वहीं अर्थव्यवस्था के जानकार इसे अस्थायी स्थिति बताते रहे। इन सबके बीच ऑटो सेक्टर नए साल से बहुत उम्मीदें लगाए बैठा है। वाहन उद्योग को आशा है नया साल 2020 उसके लिए अच्छा साबित हो। ऑटो सेक्टर को उम्मीद है कि नए साल में नई गाड़ियों के मॉडल्स और अपग्रेड मॉडल्स बाजार में आएंगे जिससे 2020 में अच्छी वृद्धि होगी। 


उद्योग को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था सुस्ती से उबरकर फिर राह पकड़ेगी और वाहनों के शोरूम में फिर खरीदारों की भीड़ दिखेगी। हालांकि, वाहन उद्योग के समक्ष एक और चुनौती भारत चरण चार (बीएस-चार) से सीधे भारत चरण छह (बीएस-छह) उत्सर्जन मानकों की ओर जाने की है। इसके अलावा उनके समक्ष नए सुरक्षा नियमों की भी चुनौती है। इनसे निश्चित रूप से वाहनों के दाम बढ़ेंगे।
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Automobile sector - फोटो : Social
दो साल में एक बार होने वाली प्रमुख वाहन प्रदर्शनी आटो एक्सपो नजदीक है। वाहन उद्योग उम्मीद कर रहा है कि इस आटो एक्सपो के जरिये वह उपभोक्ताओं को आकर्षित कर पाएगा। इस साल यानी 2019 में दोपहिया से लेकर कारों तथा हेवी ड्यूटी ट्रकों सभी खंडों में बिक्री में गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट इतनी अधिक है कि उद्योग का अनुमान है कि 2019-20 के वित्त वर्ष में उसकी थोक बिक्री इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 13 से 17 फीसदी कम रहेगी।

बिक्री में भारी गिरावट की वजह से वाहन कंपनियों को परिचालन में कई तरह की दिक्कतें आईं। वाहन कंपनियों को कई बार अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी। इस क्षेत्र में सुस्ती का आलम यह रहा है कि डीलरशिप से लेकर वाहन कलपुर्जा खंड तक करीब 3.5 लाख लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी।

हालांकि तमाम परेशानियों के बावजूद वाहन उद्योग ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम का मानना है कि 2020-21 में चीजें सुधरेंगी। सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने पीटीआई भाषा से कहा, "बीएस-छह लागू होने जा रहा है ऐसे में 2020 काफी रोमांचक साल होगा।" 
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Car Launch in India - फोटो : सांकेतिक
इस बात से इंडस्ट्री को उम्मीद
इस बारे में वढेरा ने कहा कि अगले साल के शुरू में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरने की उम्मीद है। पिछले साल के निचले आधार प्रभाव और नए मॉडलों की उपलब्धता से वाहन क्षेत्र की वृद्धि को समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से क्षेत्र की स्थिति में सुधार शुरू हो जाएगा, जो तीसरी तिमाही से दिखने लगेगा।

वढेरा ने कहा कि बीएस-छह के क्रियान्वयन का मतलब है कि पुराना सारा स्टॉक निकालना होगा। नया स्टॉक बनाना होगा। नए बीएस-छह अनुकूल वाहन पेश करने होंगे। इससे निश्चित रूप से वाहनों का उत्पादन और बिक्री बढ़ेगी। 
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Maruti Suzuki Viatara - फोटो : For Refernce Only
हालांकि, प्रौद्योगिकी के अद्यतन की वजह से वाहनों की लागत आठ से दस प्रतिशत बढ़ जाएगी। ऐसे में उद्योग को आशंका है कि इससे उसकी बिक्री और घट सकती है। वढेरा ने कहा कि अतिरिक्त लागत के इस दबाव से उबरने के लिए सियाम ने सरकार से वाहनों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को 28 से घटकर 18 प्रतिशत करने की मांग की है। साथ ही वाहनों के लिए एक प्रोत्साहन वाली कबाड़ नीति लाने की भी मांग की है।

यदि इन मांगों को मान लिया जाता है तो निश्चित रूप से वाहन उद्योग की स्थिति सुधरेगी। 
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Maruti Suzuki S-Cross
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केनिची आयुकावा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि 2020 उद्योग के लिए बेहतर वर्ष साबित होगा। आयुकावा ने कहा कि यह अनुमान लगाना कठित है कि वाहन उद्योग की स्थिति कब तक सुधरेगी लेकिन हमारा मानना है कि यह उद्योग तेजी से आगे बढ़ता रहेगा।

हुंदै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस एस किम ने कहा कि संभवत: बीएस-छह नियम लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को इसे समझने में कुछ समय लेगा। लेकिन मैं कहूंगा कि अगले साल की दूसरी छमाही से हम मांग में निश्चित रूप से सुधार देखेंगे।

होंडा कार्स इंडिया के अध्यक्ष एवं सीईओ गाकू नाकानिशी ने कहा कि इस साल उद्योग पहले ही अपने निचले स्तर को छू चुका है। हमें सुधार की रफ्तार का अनुमान नहीं है लेकिन निश्चित रूप से अगले वित्त वर्ष से स्थिति सुधरेगी।
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