क्या है सभी नौ ग्रहों का वास्तु से संबंध, किसी दिशा में कौन सी चीजें रखना शुभ
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सूर्य-
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य ग्रह है। ज्योतिष में सूर्य ऐश्वर्य और तेजस्व प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है। इस कारण से पूर्व दिशा को दोषमुक्त होना चाहिए।
चन्द्रमा
चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है। चंद्रमा शांत मन और भाग्य का अधिपति ग्रह है। वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है। इस दिशा में भोजनकक्ष और अतिथि गृह का होना शुभ होता है।
ज्योतिष में बुध ग्रह को सम्पन्नता, वाकचातुर्य, बुद्धिमानी और करियर का प्रतिनिधि करता है। बुध ग्रह की दिशा उत्तर दिशा मानी जाती है और इस दिशा के देवता कुबेर होते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार इस दिशा में अध्ययन कक्ष, तिजोरी और पुस्तकालय शुभ माने गए हैं ।
गुरु-
गुरु ग्रह की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। गुरु तेज और बौद्धिक क्षमता के कारक ग्रह माने गए है। गुरु उत्तर-पूर्व या ईशान कोण का स्वामी ग्रह है। इस दिशा के देवता भगवान विष्णु हैं। इस दिशा में पूजा स्थल अत्यंत शुभकारी माना गया है।