वास्तु शास्त्र का मूल आधार भूमि, जल, वायु एवं प्रकाश है, जो जीवन के लिए अति आवश्यक है, इनमें असंतुलन होने से नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है। वास्तु के नियमों का पालन न करने पर व्यक्ति विशेष का स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उसके रिश्ते पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। रसोई, घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हमारे बीच में यह गलत प्रचलन है कि हम मकान बनवाते समय रसोईघर को कम स्थान देने की सोचते हैं। जबकि उसका खुला-खुला वातावरण रहना अत्यंत ज़रूरी है क्योंकि जितने उपकरण तथा सामग्री रसोईघर में होती है उतना किसी अन्य जगह नहीं।
वास्तु टिप्स: अच्छी सेहत का राज छिपा होता है आपकी रसोई में, जानें कैसे
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घर में अग्नितत्व की दिशा आग्नेय कोण में रसोई का निर्माण होना चाहिए। अगर वहां इसे बनाना संभव नहीं है, तो उसे केवल उत्तर-पश्चिम भाग में बना लें। हमेशा पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई के दरवाजे बनायें। रसोई घर में चूल्हा आग्नेय कोण में रखना चाहिए और खाना पकाने वाले का मुख पूर्व दिशा की ओर होना भी आवश्यक है, इससे धन की वृद्धि तथा स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
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पीने योग्य जल का भंडारण व हाथ धोने के लिए नल ईशान कोण में होना चाहिए। रसोई में सिंक यानि बर्तन धोने की दिशा के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा शुभ मानी गई है। टोस्टर,गीजर या माइक्रोवेव, ओवन आग्नेय कोण में रखना आपके लिए लाभदायक होगा। मिक्सर,आटाचक्की, जूसर आदि आग्नेय कोण के निकट दक्षिण में रखना शुभ माना गया है। यदि रेफ्रीजिरेटर रसोई में रखना है तो इसे दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर रखें, ईशान या नैऋत्य कोण पर कदापि नहीं रखना चाहिए।
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