हमारे जीवन में कई बार अचानक परेशानियां आने लगती है और बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं। वास्तु में कुछ ऐसे सरल उपाय बताए गए हैं, जिनको अपनाकर आप अपने जीवन में सुख,समृद्धि और खुशियां ला सकते हैं।
वास्तु के पांच उपाय, जिससे दूर होती है परेशानियां और आती है सुख समृद्धि
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शुभ हो प्रवेश द्वार
वास्तु में प्रवेश द्वार को बहुत अहम माना गया है। यह घर का आइना होता है,इसे हमेशा साफ़-सुथरा रखें। यहाँ ज्यादा तड़क-भड़क वाली तस्वीरें नलगाकर शुभ प्रतीक चिह्न जैसे स्वास्तिक,ॐ,कलश, पवनघंटी, शंख,मछलियों का जोड़ा या आशीर्वाद मुद्रा में बैठे गणेश जी लगाना शुभकारक रहता है।फ्रैश अथवा प्लास्टिक की फूल-पत्तियों के तोरण से भी द्वार को सजाया जा सकता है।घर के दरवाजे कभी भी अनियमित आकार के या टूटे-फूटे नहीं होने चाहिए,ऐसा होने से ये परिवार की तरक्की में बाधा आने का बड़ा कारण बन सकते हैं।
मेन गेट के आगे न हो अवरोध
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने कोई बड़ा वृक्ष,गड्ढा या कोई बड़ा पिलर नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर घर के सदस्यों के बीच मन-मुटाव और ईर्ष्या की स्थिति उत्पन्न होती है। घर के सदस्यों को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।अगर ऐसा है तो घर के मेन गेट पर स्वास्तिक बनाएं एवं मेन गेट के दोनों तरफ तुलसी के पौधे रख दें। ऐसा करने से घर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करेगी।
रंग भरें खुशियों के
वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर पेंट कराने से घर में पंचतत्वों का संतुलन ठीक रहता है,खुशहाली बनी रहती है।हल्के नीले एवं हरे रंग को वास्तु में स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छे माने गए हैं। इन रंगों का प्रयोग घर के ड्राइंग रूम में करना उचित है।पीला रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।अतः इस रंग को अध्ययन कक्ष में प्रयोग करना लाभप्रद होता है।उत्साहवर्धक एवं अवसाद का नाश करने वाले बैंगनी रंग को पूजा कक्ष में किया जाना शुभ होता है।गुलाबी,लाल,नारंगी रंग आपसी संबंधों को सुदृढ़ बनाते हैं इसलिए शयन कक्ष में इनका प्रयोग करना बेहतर होगा।इसी प्रकार रसोईघर में लाल रंग शुभ फलों में वृद्धि करता है।घर के मुख्य द्वार के लिए रंग का चुनाव दिशा के आधार पर किया जाना चाहिए,ऐसा करने से सौहार्दपूर्ण माहौल बनेगा।
मिलेगा ईश्वर का आशीर्वाद
मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र उत्तर-पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान है। इस दिशा में पूजाघर या अपने इष्टदेव की तस्वीर स्थापित करें। ऐसा करने से आपको हमेशा परमात्मा का मार्गदर्शन मिलता रहता है। यह दिशा योग,प्राणायाम और ध्यान के लिए भी श्रेयस्कर है। अपने दिवंगतों की फोटो दक्षिण-पश्चिम में लगाएं। शुभ परिणामों के लिए घर के पश्चिम जोन में आप अपने गुरु की फोटो लगाकर पूजन कर सकते हैं। पूजाघर के नीचे या ऊपर शौचालय नहीं होना चाहिए। महाभारत की पुस्तक ,प्राणी तथा पक्षियों के चित्र यहाँ नहीं होने चाहिए।दक्षिण-पश्चिम की दिशा में निर्मित कमरे का प्रयोग पूजा-अर्चना के लिए नहीं किया जाना चाहिए।