वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्ताह का हर वार किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। इस दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता भगवान शनि की विशेष पूजा की जाती है। अगर आपके काम नहीं बनते हैं और कार्यो में लगातार असफलताएं प्राप्त होती हैं तो शनिवार के दिन कुछ उपाय कर परेशानियों को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि लाई जा सकती है। इसके अलावा जिन लोगों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चलती है उनको इसके प्रभाव को कम करने या फिर खत्म करने के लिए शनिवार के दिन विशेष उपाय किए जाते हैं जिनको करने से व्यक्ति के जीवन में दुर्भाग्य खत्म हो जाता है और जीवन में सौभाग्य में वृद्धि होती है।
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शनिदेव के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनिवार के दिन काला चना, काली उड़द दाल,काले तिल,लोहा और काले कपड़े का दान करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य के जीवन में सुख-शांति रहती है।
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धार्मिक मान्यता है कि शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष में शनिदेव का वास होता है। पीपल वृक्ष की शनिवार के दिन विशेष पूजा करने से व्यक्ति के सभी संकट दूर होने के साथ धन, समृद्धि, यश, कीर्ति आदि की भी प्राप्ति भी होने लगती है।शनिवार को रात के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से मनुष्य के जीवन में खुशहाली आती है।
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शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। इस दिन इन्हें नीले रंग का फूल अर्पित करें और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। अपराजिता का फूल नीले रंग का होता है, यह फूल शनिदेव को बहुत प्रिय है। शनिवार के दिन 5, 7, 11 अपराजिता के फूल लेकर शनिदेव के चरणों में चढ़ा दें, शनिदेव जल्द प्रसन्न हो जाएंगे और शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूरी हो जाएगी।
शनि देव की पूजा में सरसों या तिल का तेल अर्पित करना बहुत लाभदायक माना गया है। तेल चढ़ाने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कारण आ रहे जीवन में कष्टों से छुटकारा मिलता है और रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं। ऐसा करने से सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और धन-यश की प्राप्ति होती है एवं नौकरी और व्यापार में सफलता मिलती है। शनि देव को तेल चढ़ाने से हनुमानजी की भी कृपा बनी रहती है।