ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व है। वैदिक ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश का दर्जा मिला हुआ है। यह व्यक्ति को कर्मों के अनुसार उन्हें शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह दुख, शारीरिक कष्ट, लोहा, तेल तकनीकि और कारागार के कारक माने गए हैं। शनि के कुंडली में शुभ भाव और अपने मित्रों के संग बैठने पर जातक को तमाम तरह के सुख प्रदान करते हैं। लेकिन शनि अगर जातक की कुंडली में अशुभ भाव में बैठे हैं तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां आरंभ हो जाती है।
मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव को ऐसे करें प्रसन्न
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शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। शनि सभी 12 राशियों में तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के माने गए हैं। शनि मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह एक राशि में ढाई वर्षो तक रहते हैं। जब शनि जिस राशि में ढाई वर्षों तक रहते हैं उस राशि पर और राशि चक्र में आगे और पीछे की राशि पर साढ़ेसाती यानी सात वर्षों तक शनि की दशा चली है।
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शनि न्याय के देवता है वह हर व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। मान्यता है कि शनि जिस व्यक्ति पर अपनी कृपा दृष्टि रख देते हैं उसे सभी तरह की सुख सुविधा, मान सम्मान और वैभव की प्राप्ति होती है। वहीं अगर शनि की अशुभ छाया किसी भी जातक पर पड़ जाती है उसका सब कुछ छीन लेते हैं। शास्त्रों मे शनि की अशुभ स्थिति को शुभ स्थिति में बदलने के कुछ उपाय बताए गए हैं।
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