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गोचर करते हुए शनिदेव आपकी कुंडली के 12 भावों में कैसे देते हैं फल
फलित ज्योतिष में शनिदेव को लंबे शरीर वाला, लाल-लाल आंखें, भूरे रंग वाला, मोटे केश और बड़े-बड़े दांतों वाला बतलाया गया है। ये मृत्यु लोक के दंडाधिकारी हैं। मकर तथा कुंभ राशि के स्वामी शनि तुला राशि में उच्चराशिगत तथा मेष राशि में नीच राशिगत संज्ञक कहे गए हैं। प्राणियों के जीवन में सफलता और असफलता का ग्राफ काफी कुछ इन्हीं की कृपा पर निर्भर करता है। आपकी जन्मकुंडली में शनिदेव किस भाव में है और उसका क्या फल रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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प्रथम भाव- किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि शनिदेव प्रथम भाव में रहते हैं तो जातक को भौतिक सुखों की प्राप्ति तो करवाते हैं किंतु उसकी कार्य गतिविधियों पर भी नजरे जमाए रहते हैं। जातक के अंदर तरह-तरह के विकार उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है। नीच राशि के शनि स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं किंतु स्वग्रही या उच्चराशि का होने पर राजयोग का निर्माण करते हैं। इस भाव में बलवान शनि जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं तथा उसे अध्यात्म का गूढ़ ज्ञान भी देते हैं।
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द्वितीय भाव- इस भाव में शनिदेव जातक के लिए मिलाजुला फल देते हैं काफी प्रबल संभावना रहती है कि ऐसे लोंगों को वाणी दोष तथा दाहिनी आंख से संबंधित बीमारी का सामना भी करना पड़ता हैं। रोचक घटना यह भी रहती है कि जातक के निवास स्थान के दाहिनी तरफ के पड़ोसियों से कुछ न कुछ विवाद बना रहता है। इस भाव में शनिदेव की शुभस्थिति व्यक्ति को आर्थिक रूप से काफी मजबूत बनाती है किंतु अशुभ स्थिति के परिणाम स्वरूप आर्थिक हानि का सामना भी करना पड़ता है।
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तृतीय भाव- किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि शनिदेव तृतीय भाव में हों तो वह अति उत्साही, पराक्रमी तथा अपने साहस के बलपर विषम परिस्थितियों से लड़ते हुए विजय प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति छोटे स्तर से कार्य करते हुए जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचते हैं और उन्हें अपना परिचय कराने की आवश्यकता नहीं रहती वे समाज में अच्छी ख्याति प्राप्त करते हैं। ऐसे लोगों को भाइयों से सहयोग तो नहीं मिलता किंतु यह स्वयं उनके सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं।
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चतुर्थ भाव- किसी भी व्यक्ति की कुंडली में यदि शनिदेव चतुर्थ भाव में होते हैं तो वह इस बात का संकेत होता है कि जातक को जीवन में कठोर संघर्षों का सामना करना पड़ेगा। अशुभ स्थिति हो तो ये प्राणी को मानसिक रूप से अति प्रताड़ित करते हैं और माता-पिता में से एक का सुख छीन लेते हैं या किसी एक का स्वास्थ्य हर समय खराब रहता है। ऐसे लोगों को मित्रों तथा संबंधियों से नुकसान उठाना पड़ता है। शनिदेव शुभ हों अथवा अपने घर में या उच्च राशि के हों तो सभी ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
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