Shani Dev Puja Vidhi: शास्त्रों में शनिदेव की पूजा करने और उनकी कृपा पाने के लिए शनिवार के दिन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करने से शनि की अशुभ छाया से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष में शनिदेव को न्याय का कारक ग्रह कहा गया है। इन्हें सभी ग्रहों का न्यायाधीश माना गया है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ भाव में रहते हैं उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के नौकरी, सेहत, धन और दांपत्य जीवन में परेशानी बनी रहती है। वहीं अगर किसी जातक की कुंडली में शनि शुभ भाव में विराजमान हों तो व्यक्ति का जीवन ऐशोआराम से बीतता है। ऐसे व्यक्ति पर शनि महाराज की विशेष कृपा होती है जिस कारण से वह रंक से राजा भी बन जाता है। शनि देव को कुंभ और मकर राशि का स्वामित्व प्राप्त है।
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Shani Puja: शनिवार को ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न, कम होगा साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
Sat, 03 Jul 2021 12:16 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 03 Jul 2021 12:16 PM IST
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shani dev: शनि देव को कुंभ और मकर राशि का स्वामित्व प्राप्त है।
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शनि का साढ़ेसाती और ढैय्या
शनिदेव सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। ये किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए ढाई वर्ष का समय लेते हैं। शनि के राशि परिवर्तन से कुछ राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कुछ पर ढैय्या लग जाती है। इस वर्ष शनि का राशि परिवर्तन नहीं हुआ है। शनिदेव मकर राशि में गोचर कर रहे हैं जिस कारण से धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती और मिथुन व तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है।
शनिदेव सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। ये किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए ढाई वर्ष का समय लेते हैं। शनि के राशि परिवर्तन से कुछ राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कुछ पर ढैय्या लग जाती है। इस वर्ष शनि का राशि परिवर्तन नहीं हुआ है। शनिदेव मकर राशि में गोचर कर रहे हैं जिस कारण से धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती और मिथुन व तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है।
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कब होगा शनि का राशि परिवर्तन
शनि ढाई वर्षों में राशि बदलते हैं। शनि 24 जनवरी 2020 को मकर राशि में प्रवेश किया था और तब से अब तक इसी राशि में हैं। शनि 29 अप्रैल 2022 को मकर को छोड़ते हुए कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने से धनु राशि के जातकों को शनि साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन मीन राशि पर साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या लगेगी।
शनि ढाई वर्षों में राशि बदलते हैं। शनि 24 जनवरी 2020 को मकर राशि में प्रवेश किया था और तब से अब तक इसी राशि में हैं। शनि 29 अप्रैल 2022 को मकर को छोड़ते हुए कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने से धनु राशि के जातकों को शनि साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन मीन राशि पर साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या लगेगी।
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कैसे करें शनि पूजा और उपाय
शनिवार के दिन ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: का मंत्र पढ़ें। इसके साथ हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
शनिवार के दिन ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: का मंत्र पढ़ें। इसके साथ हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।