हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनि जयंती 10 जून, गुरुवार को है। ज्योतिष की गणनाओं में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। इस बार शनि जयंती पर सूर्यग्रहण भी लगेगा। जिन लोगों के ऊपर शनिदोष होता है उनके जीवन में उन्हें तमाम तरह की कठिनाओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिशास्त्र के अनुसार शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढैय्या बहुत ही कष्टकारी होती है। शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र है लेकिन पिता और पुत्र में हमेशा बैर भाव ही बना रहता है। सभी ग्रहों में शनि सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं, ये किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि के किसी एक राशि में गोचर करने पर तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और दो पर ढैय्या चलती है। शनि एक राशि में दोबारा 30 वर्षो के बाद ही आते हैं। ज्योतिष और आस्था के नजरिए से शनि के विशेष महत्व होता है। शनि जयंती के मौके पर आइए जानते हैं शनिदेव से जुड़ी हुई 10 खास बातें...
Shani Jayanti 2021: 10 जून को शनि जयंती, जानें शनिदेव से जुड़ी 10 खास बातें
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सभी ग्रहों में प्रमुख शनि
- शनिदेव सभी नौ ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ होने का भगवान शिव से आशीर्वाद मिला है। इनकी दृष्टि से मनुष्य क्या देवता भी भयभीत रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में तमोगुण की प्रधानता वाले क्रूर ग्रह शनि को दुख का कारक बताया गया है। वह देव, दानव और मनुष्य आदि को त्रास देने में समर्थ हैं शायद इसीलिए उन्हें दुर्भाग्य देने वाला ग्रह माना जाता है। किंतु वास्तव में शनिदेव देवता हैं। मनुष्य के दुख का कारण स्वयं उसके कर्म हैं, शनि तो निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति बुरे कर्मों के आधार पर वर्तमान जन्म में दंड भोग का प्रावधान करते हैं।
भगवान शनि की धीमी चाल और लंगड़ा कर चलने के पीछे का कारण पिप्पलाद मुनि हैं। पिप्लाद मुनि अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव को मानते थे। पिप्पलाद मुनि ने शनि पर ब्रह्रादण्ड से प्रहार किया। शनि यह प्रहार सहन करने में असमर्थ थे जिस कारण से शनि तीनों लोकों में दौड़ने लगे। इसके बाद ब्रह्रादण्ड ने उन्हें लंगड़ा कर दिया।
बच्चों पर क्यों नहीं पड़ती शनि छाया
12 साल तक के बच्चों पर शनि का प्रकोप कभी नहीं रहता है। इसके पीछे पिप्पलाद और शनि के बीच हुए युद्ध का कारण है। पिप्पलाद ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे।
शनिदेव काले क्यों
शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं और वह अपने गर्भ में पल रहे शनि की चिंता किए बगैर हमेशा भगवान शिव की तपस्या में लीन रहती थीं। इस कारण से ना तो वह खुद अपना और ना ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती थीं। जिसके कारण से शनि काले और कुपोषित पैदा हुए।