सावन का पवित्र महीना चल रहा है। 3 अगस्त को सावन के आखिरी सोमवार पर यह महीना खत्म हो जाएगा। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है। इस पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कई तरीके पूजा की जाती है। इनको प्रसन्न करने के लिए शिव मंत्रों का जाप करना बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है। इन्हीं मंत्रों में से सबसे प्रभावी महामृत्युंजय मंत्र है। शिवपुराण के अनुसार गंभीर बीमारियों और मानसिक परेशानियों को दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र बहुत ही उपयोगी होता है। इस मंत्र के जाप में इतनी शक्ति होती है कि मृत्यु के करीब पहुंच चुके व्यक्ति को जीवनदान मिल जाता है।
Savan 2020: सावन के महीने में क्यों करना चाहिए महामृत्युंजय मंत्र का जप?
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ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
एक तरफ जहां महामृत्युंजय मंत्र के जाप का धार्मिक महत्व है तो वहीं दूसरी तरफ यह विज्ञान से भी जुड़ा हुआ है। महामृत्युंजय मंत्र की शुरुआत ऊं से होती है। ऊं के उच्चारण से सांस क्रिया पर प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में मौजूद चक्रों में ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। शरीर में मौजूद चक्रों के कंपन से शरीर में स्पूर्ति आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में विस्तार होता है।
महामृत्युंजय मंत्र का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
महामृत्युंजय मंत्र के प्रत्येक अक्षरों का विशेष महत्व है। इन अक्षरों को उच्चारण करते समय अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां निकलती हैं जिसे शरीर में एक खास तरह का कंपन होता है। इस कंपन से शरीर में और आस पास के वातावरण में एक विशेष प्रकार की एनर्जी निकलती है। जो व्यक्ति को मानसिक ऊर्जा के साथ-साथ और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
धार्मिक महत्व
धार्मिक नजरिए से इस महामंत्र का विशेष महत्व होता है। जो भी व्यक्ति इस महामंत्र का जाप करता है उसको कई दोषों से मुक्ति मिलती है। इस महामंत्र की स्तुति का वर्णन और महत्व ऋग्वेद, यजुर्वेद, पद्मपुराण और शिवपुराण में किया गया है। शिवपुराण के अनुसार इस मंत्र के जाप से आरोग्यता, लंबी आयु, यश और कीर्ति में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा इस महा मंत्र का उपयोग ज्योतिष शास्त्र में किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि कुंडली में मौजूद मांगलिक दोष, कालसर्प दोष और संतान सुख में आई हुई बाधा को दूर करने में महामृत्युंजय जाप काम करता है। मान्यता है दानवों के गुरु शुक्राचार्य ने महामृत्युंजय मंत्र के अनुष्ठान का उपयोग कर देवताओं के हाथों मारे गए राक्षसों को दोबारा जीवित कर दिया था।