ज्योतिष में कुल मिलाकर नौ ग्रह बताएं गए हैं। हर ग्रह अलग-अलग फल प्रदान करता है। इन्हीं ग्रहों में से होता है केतु, ज्योतिष में केतु को पापक ग्रह माना गया है। यह ग्रह हमेशा ही अशुभ फल नहीं देता हैं। इसकी सही स्थिति के कारण जातक अध्यात्म और धार्मिक कार्यों की ओर अग्रसर होता है लेकिन इस ग्रह के कुपित होने से जातक को जीवन में कई तरह की बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब यह ग्रह कुपित हो जाता है, तब जातक के व्यवहार में विकार आने लगते हैं। इस ग्रह के कुपित होने पर पारिवारिक अशांति, रोग आदि कई चीजों का सामना करना पड़ सकता है। केतु को अनुकूल बनाने के लिए कई उपाय बताएं गए हैं, जिन्हें करने से आप केतु की खराब स्थिति से छुटकारा पा सकते हैं। जानते हैं राहु के कारण होने वाली परेशानियां और उससे बचने के उससे बचने के उपाय....
केतु के कुपित होने से रोग और पारिवारिक अशांति के साथ आती हैं कई बड़ी परेशानियां, जानें उपाय
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केतु कुपित होने पर जातक में झूठ, छल, कपट और किसी के प्रति षडयंत्र रचने के साथ काम वासना तीव्र होने जैसे अवगुण पैदा होने लगते हैं जिसके कारण जातक गलत कार्यों की ओर अग्रसर होने लगता है। जिसकी वजह से उसे कोर्ट कचहरी आदि के चक्कर तक काटने पड़ सकते हैं।
केतु के अशुभ प्रभाव से वैवाहिक जीवन में अशांति, पिता के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली के लग्न में षष्ठम, अष्ठम तथा एकादश यानि ग्यारहवमें भाव में केतु की स्थिति को शुभ नहीं माना जाता है।
खराब केतु आपके लिए रोगों का कारण भी बन सकता है। केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से वात और पित्त विकार, पेट संबंधित समस्याएं, संतान उत्पत्ति में बाधा, गर्भपात, पथरी, गुप्त आदि रोग होने की आशंका रहती है।
यदि आप केतु के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं तो आपको लाल चंदन की माला किसी से अभिमंत्रित करवाकर धारण करनी चाहिए। यह कार्य शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को करें।
केतु से पीड़ित जातक को उसके अशुभ प्रभावों के मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
केतु ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए तिल, कम्बल, काले पुष्प, काले वस्त्र, उड़द की काली दाल, लोहा, काली छतरी आदि का वस्तुओं का दान करना चाहिए।
किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार को असगंध की जड़ को केतु के मंत्र से अभिमंत्रित करके नीले धागे में धारण करनी चाहिए। इससे केतु के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।