Vyatipat Yog 2025: ज्योतिष शास्त्र में योगों का बहुत खास महत्व है, जिनमें से एक विशेष और दुर्लभ योग है व्यतिपात योग। हिंदू पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई को यह व्यतिपात योग बन रहा है, जो 27 नित्य योगों में से एक अत्यंत अशुभ और सख्त योग माना जाता है। इस योग के दौरान नए काम जैसे शादी, व्यापार, बड़े समझौते, निवेश, या गृहप्रवेश आदि करने से बचना चाहिए क्योंकि यह समय अनुकूल नहीं माना जाता। यदि इन कार्यों को टालना संभव न हो, तो इन्हें शुभ मुहूर्त जैसे अभिजीत, गुरु पुष्य या शुभ चौघड़िया के समय करना अधिक लाभदायक रहता है।
Vyatipat Yog 2025: 26 जुलाई को व्यतीपत योग का प्रभाव, जानिए क्या करें, क्या न करें
हिंदू पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई को यह व्यतिपात योग बन रहा है, जो 27 नित्य योगों में से एक अत्यंत अशुभ और सख्त योग माना जाता है। इस योग के दौरान नए काम जैसे शादी, व्यापार, बड़े समझौते, निवेश, या गृहप्रवेश आदि करने से बचना चाहिए
कब है व्यतिपात योग
साल 2025 में जुलाई महीने का व्यतिपात योग 26 जुलाई को पड़ रहा है। यह विशेष योग शनिवार, 26 जुलाई को सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन 27 जुलाई रविवार को सुबह 4 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगा। इस प्रकार, व्यतिपात योग 26 जुलाई को पूरे दिन प्रभावी रहेगा और शुभ कार्यों व विशेष साधनाओं के लिए उपयुक्त नहीं माना जाएगा।
व्यतिपात योग क्या है?
व्यतिपात योग हिंदू पंचांग के 27 योगों में से एक महत्वपूर्ण योग है, जो सूर्य और चंद्रमा की दीर्घांश के विशेष संयोग से बनता है। यह एक नित्य योग है, यानी हर महीने किसी न किसी तिथि पर आता है। शास्त्रों के अनुसार, व्यतिपात योग को अशुभ और कठिन योगों में गिना जाता है। इसे दोषयुक्त, विघ्नकारक और भ्रम उत्पन्न करने वाला माना गया है। इस योग में अक्सर विवाद, दुर्घटना, असमंजस और मानसिक अशांति की स्थिति बन सकती है। इसलिए इस योग के दौरान शुभ कार्यों, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत आदि से बचना चाहिए। इसे एक ऐसा समय माना गया है जिसमें सतर्क रहना और मानसिक शांति बनाए रखना आवश्यक होता है।
व्यतिपात योग पर करें ये उपाय
26 जुलाई 2025, शनिवार को पड़ने वाला व्यतिपात योग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, यह योग भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और इस दौरान कुछ खास उपाय करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि, मंगल, राहु-केतु के दोष, या साढ़ेसाती चल रही हो, तो इस योग के दौरान भगवान शिव के स्तोत्रों का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। विशेष रूप से ‘शिव स्तोत्रम्’ का पाठ करने से नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव कम होता है और जीवन में शांति, स्थिरता व शुभता आने लगती है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किया गया शिव पूजन जीवन के तमाम दोषों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
क्या करें
- इस दिन "ॐ त्र्यंबकं यजामहे..." महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
- साथ ही हनुमान चालीसा और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना भी लाभकारी होता है।
- रुद्राभिषेक करके भगवान शिव की आराधना करें। हनुमान जी और गणेश जी की पूजा भी विशेष फलदायक मानी जाती है।
- इस योग में काले तिल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, कंबल, अन्न या जल का दान करना शुभ होता है।
- दिन भर साधना, आत्मचिंतन, उपवास, नेगेटिविटी को दूर करने वाले अभ्यास करें।
- अगर किसी जरूरी कार्य को टालना संभव न हो, तो उसे अभिजीत मुहूर्त, शुभ चौघड़िया, या स्थान विशेष के अनुसार शुभ लग्न में ही करें।