विष्णु पुराण में भारतवर्ष तथा समस्त पृथ्वी को 27 नक्षत्रों में बाँट कर ग्रहों के गोचर के माध्यम से शुभ-अशुभ घटनाओं को देखने के लिए कूर्म-चक्र का वर्णन दिया गया है। यहाँ कूर्म का अर्थ कछुआ है जो की एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से दूसरा अवतार है। समस्त भूमंडल को एक कछुए के आकार में 27 नक्षत्रों में बाँट कर विष्णु पुराण में दी गयी कूर्म चक्र की प्राचीन विधि के विषय में आज से डेढ़ हज़ार वर्ष पूर्व आचार्य वराहमिहिर ने अपने महान ग्रन्थ बृहत् संहिता में उस समय के अनेक प्रदेशों और राज्यो का वर्णन किया है।
कूर्म-चक्र और सूर्य ग्रहण की कुंडली जता रही है बड़े खतरे की आशंका
सचिन मल्होत्रा/ज्योतिषशास्त्री
Updated Tue, 16 Aug 2016 03:53 PM IST
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कूर्म-चक्र और सूर्य ग्रहण की कुंडली जता रही है बड़े खतरे की आशंका
कूर्म-चक्र और सूर्य ग्रहण की कुंडली जता रही है बड़े खतरे की आशंका
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