वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की विशेष भूमिका मानी जाती है। शनि ग्रह को आयु, रोग, परेशानी, विज्ञान और तकनीकी आदि के कारक ग्रह माना जाता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में स्थान परिवर्तन के लिए लगभग ढाई वर्षों का समय लगाते हैं। शनि की धीमी चाल की वजह से जातकों के ऊपर शनि का शुभ या अशुभ प्रभाव काफी दिनों तक रहता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि मजबूत अवस्था में होते हैं उनके जीवन में हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है वहीं अगर जातक की कुंडली में शनि कमजोर है तो व्यक्ति के जीवन में परेशानी ही परेशानी होती है।
Shani Uday 2024: कुंभ राशि में शनि होंगे उदय, इन राशि वालों के लिए खुशखबरी और इनकी बढ़ेंगी परेशानियां
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह को दो राशियां का स्वामित्व प्राप्त है। पहला मकर और दूसरा कुंभ राशि को। शनिदेव तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। इसे ही शनि की ढैय्या कहते हैं। शनि की दशा साढ़ेसात साल की होती है जिसे साढ़ेसाती कहा जाता है। इस तरह से ढाई-ढाई साल के तीन चरण होते हैं। वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यानी जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उन्हें अपने जीवन में शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। वहीं जो जातक अपने जीवन में बुरे कर्म करता है उन्हें शनि दण्ड भी देते हैं। इसी वजह से शनि को दण्डाधिकारी और न्याय का कारक ग्रह माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि के राशि परिवर्तन के अलावा शनि का अस्त और उदय होना भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिदेव 18 मार्च को कुंभ राशि में उदय हो रहे हैं। आपको बता दें कि शनि इससे पहले 11 फरवरी 2024 को कुंभ राशि में ही अस्त हुए थे, जो अब 18 मार्च को को सुबह 07 बजकर 49 मिनट पर उदित हो जाएंगे। शनिदेव को दोबारा किसी राशि में आने पर करीब 30 साल का समय लगता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई ग्रह सूर्य के निकट एक निश्चित दूरी पर आ जाता है तो सूर्य के तेज के कारण वह अपना मूल प्रभाव छोड़ देता है इसे ही ग्रहों का अस्त होना कहते हैं और जब ग्रह सूर्य से दूर होता है वह उदित होता जाता है। ज्योतिष में जब भी कोई ग्रह अस्त होता है तो उसे शुभ नहीं माना जाता है वहीं जब कोई ग्रह उदय होता वह अपने मूल स्वभाव में दोबारा आ जाता है।
मेष राशि
18 मार्च से शनि का कुंभ राशि में उदय होने से काफी दिनों से चली आ रही आपकी परेशानियां खत्म होगी। मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं।
कुंभ राशि में शनि के उदय होने से आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर मिलेंगे। वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि नवम भाव और दशम भाव के स्वामी हैं और वर्तमान समय में आपके दशम भाव में गोचर कर रहे हैं।