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Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि आज, जानें विधि और चार प्रहरों की पूजा का महत्व
Wed, 23 Jul 2025 06:40 AM IST
ज्योति मेहरा
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 23 Jul 2025 06:40 AM IST
सार
श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि या श्रावण शिवरात्रि कहा जाता है। श्रावण का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है और उनकी पूजा के लिए शुभ होता है। इसलिए, श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
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Sawan Shivratri 2025
- फोटो : Adobe stock
Sawan Shivratri 2025 Date: आज सावन शिवरात्रि का पर्व है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है। एक वर्ष में एक महाशिवरात्रि और 11 शिवरात्रियां पड़ती हैं, जिन्हें मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मासिक शिवरात्रि हर माह में एक बार आती है। इस तरह से 12 शिवरात्रि होती हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं
चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
- फोटो : adobe
चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
शिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहरों की पूजा का विशेष विधान है। भक्त रात्रि के प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्रियों से शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक पहर में शिव को अलग भोग, फूल और मंत्र अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूरी रात्रि जागरण और पूजा, भक्त की सारी बाधाओं को दूर करती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति कराती है।
शिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहरों की पूजा का विशेष विधान है। भक्त रात्रि के प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्रियों से शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक पहर में शिव को अलग भोग, फूल और मंत्र अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूरी रात्रि जागरण और पूजा, भक्त की सारी बाधाओं को दूर करती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति कराती है।
चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
- फोटो : अमर उजाला
रात्रि को चार प्रहरों में बांटा गया है और शिवरात्रि की पूजा हर प्रहर विशेष विधि से की जाती है। चारों पहरों की पूजा का मुख्य उद्देश्य है शिव के चार रूपों और गुणों की साधना और रात्रि के प्रत्येक भाग में आत्मा को शुद्ध करते हुए शिव में लीन होना। असल में, रात का हर पहर हमारी भीतर की एक अवस्था दर्शाता है, जैसे कि शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्म (परमात्मा)। इन चार पहरों में शिव की चार पद्धतियों से आराधना करने पर साधक को पूर्णता प्राप्त होती है।
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चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
- फोटो : adobe
लिंग पुराण में कहा गया है कि शिवरात्रि के दिन, विशेषकर श्रावण मास में, उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दुग्ध अर्पित करने से सौभाग्य, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी पुराण में एक कथा मिलती है जिसमें चांडाल द्वारा अनजाने में शिवरात्रि के दिन बेलपत्र चढ़ाने से मोक्ष प्राप्त हुआ।
सावन शिवरात्रि की रात्रि को ‘निशीथ काल’ में शिवपूजन का विशेष महत्व है। निशीथ काल, अर्थात मध्यरात्रि में, जब शिव तांडव में लीन होते हैं, उस समय शिवाभिषेक, महामृत्युंजय जाप से विशेष सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
अग्नि पुराण में कहा गया है कि – ‘श्रावणस्य तु मासे तु शिवार्चनं विशेषतः। सर्वकामसमृद्ध्यर्थं भवत्येव न संशयः॥’ – अर्थात, श्रावण मास में शिव का पूजन निश्चित ही सर्वकामनाओं की पूर्ति करता है।
सावन शिवरात्रि की रात्रि को ‘निशीथ काल’ में शिवपूजन का विशेष महत्व है। निशीथ काल, अर्थात मध्यरात्रि में, जब शिव तांडव में लीन होते हैं, उस समय शिवाभिषेक, महामृत्युंजय जाप से विशेष सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
अग्नि पुराण में कहा गया है कि – ‘श्रावणस्य तु मासे तु शिवार्चनं विशेषतः। सर्वकामसमृद्ध्यर्थं भवत्येव न संशयः॥’ – अर्थात, श्रावण मास में शिव का पूजन निश्चित ही सर्वकामनाओं की पूर्ति करता है।
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सावन माह में शिव आराधना का महत्व
- फोटो : adobe
सावन शिवरात्रि पर शिव पूजा की विधि -
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें.
- गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें.
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, फल और धूप-दीप अर्पित करें.
- 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करें. 5. रात्रि जागरण करें. रातभर शिव भजन, स्तोत्र या शिव पुराण का पाठ करें।
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य