सितंबर का महीना ग्रहों के उथल-पुथल से भरा रहने वाला महीना है। करीब 18 महीनों के बाद छाया ग्रह राहु-केतु अपनी राशि बदलने वाले हैं। 23 सितंबर को राहु वृषभ राशि में और केतु वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में शनि के बाद राहु-केतु ही ऐसे ग्रह हो जो एक राशि में 18 महीनों तक रहते हैं। राहु ग्रह हमेशा वक्री चाल से चलते हैं यानी इनकी चाल पीछे की होती है। जैसे राहु मिथुन से वृषभ राशि में वक्री होकर अगले 18 महीनों तक इसी राशि में भ्रमण करेंगे। राहु का वृषभ राशि में प्रवेश में हो रहा है और केतु का वृश्चिक राशि में। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं और यह राहु के साथ मित्रवत व्यवहार रखते हैं। ऐसे में राहु के वृषभ राशि में गोचर से मेष राशि के जातकों पर इसका कैसा पड़ेगा प्रभाव जानते हैं।
18 महीने बाद राहु का राशि परिवर्तन, मेष राशि पर इसका कैसा असर
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वैदिक ज्योतिष में राहु का महत्व
राहु एक छाया ग्रह है। हिंदू धर्म में राहु को अशुभ माना जाता है। शनि की ही तरह राहु को क्रूर ग्रह माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मत के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में राहु अशुभ स्थान पर बैठ जाते हैं या कुंडली में अशुभ ग्रह के साथ राहु की युति होने पर परिणाम अशुभ मिलते हैं। राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं है।
राहु को एक अशुभ ग्रह कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे दिन में एक समय ऐसा आता है जब राहु का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। ज्योतिष में इस समयावधि को अशुभ समय माना जाता है। इस अशुभ समय में किसी भी तरह का शुभ कार्य का शुभारंभ नहीं किया जाता है। इसे ही राहुकाल कहते हैं। इस राहुकाल का समय लगभग डेढ़ घंटे का होता है।
करीब 18 महीनों के बाद राहु का राशि परिवर्तन मेष राशि के जातकों पर व्यापक प्रभाव डालेगा। राहु का राशि परिवर्तन मेष राशि पर मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। आय के मामले में मेष राशि के जातकों को पहले से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। नौकरी में प्रमोश मिलने की संभावना है या फिर नई नौकरी की तलाश पूरी होने वाली है। हालांकि सेहत में गिरावट देखने को मिल सकती है। परिवार के सदस्यों के साथ मनमुटाव हो सकता है।