फलित ज्योतिष में छाया ग्रहों के प्रभाव का सर्वाधिक महत्व है क्योंकि, जन्मकुंडली में छाया ग्रहों की स्थिति के ही अनुसार मनुष्य को अपने आंतरिक भाव का बोध हो सकता है जिसके फलस्वरूप मनुष्य अपना जीवन यापन अधिक अर्थपूर्ण कर सकता है। केतु को रहस्यमयी कांति कथा गौरवशाली ज्योति किरण कहा गया है। अनेकों फलित ग्रंथों में कहा गया है कि मंगल, राहु, शनि, केतु तथा सूर्य पहाड़ों एवं जंगलों में घूमाते हैं इसका तात्पर्य यह है कि इन ग्रहों का दीक्षा संस्कार से संबंध बतलाना है। केतु का पर्यायवाची शब्द ध्वजा तथा शिखी है ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि केतु के प्रभाव से जातक दीक्षा की परीक्षा ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति एवं आत्मबोध में सफल होता है। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में केतु जिस भाव में रहते हैं उस ग्रह के स्वामी के अनुसार फल देते हैं अथवा जिस ग्रह के साथ रहते हैं उस ग्रह के प्रभाव में वृद्धि करते हैं। यदि ग्रह शुभ हैं तो शुभता में और ग्रह अशुभ है तो अशुभता में वृद्धि करेंगे। छाया ग्रहों का यही प्रभाव रहता है। जन्म कुंडली के अनुसार आपके संपूर्ण जीवन में केतु का प्रभाव कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
राशि परिवर्तन: 18 महीने बाद बदल रही है केतु की चाल, जानिए कुंडली पर इसका प्रभाव
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 03 Sep 2020 11:16 AM IST
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