सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इस चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 55 मिनट की होगी। ग्रहण रात 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा जो 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। इससे पहले 26 जुलाई, 1953 को लंबी अवधि वाला चंद्र ग्रहण लगा था।
ग्रहण काल में स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के समय किसी भी शुभ वस्तु को स्पर्श नहीं करना चाहिए। भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना भी दोषपूर्ण होता है। ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य में देव पूजन व मोक्ष के समय अन्न, वस्त्र, धनादि का दान करना चाहिए।
भारत में सबसे पहले ग्रहण का आरंभ असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल में देखा जा सकेगा। फिर देश के बाकी हिस्सों में यह ग्रहण दिखेगा।
ग्रहण के समय ‘ऊं क्षीरपुत्राय विह्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्।’ इसमें मंत्र जाप से विशेष लाभ होता है। ग्रहण के समय तुलसी, शमी, वृक्ष आदि को नहीं छूना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मान्यता है कि जब ग्रहण पड़ रहा हो, तो भोजन पकाना, सोना और सीना-पिरोना आदि कार्य भी अशुभ फल देते हैं, इसलिए इन कार्यों से भी बचना चाहिए।