सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले और सौम्य ग्रह बृहस्पति अब 9 अक्तूबर 2024 को मिथुन राशि में वक्री हो गए हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु को अच्छे गुण प्रदान करने और भाग्य का निर्धारण करने वाला ग्रह माना गया है। गुरु ग्रह संतान, शिक्षा, ज्ञान, धन और धार्मिक कार्यों के कारक होते हैं। ज्योतिष में गुरु ग्रह को शुभ और मांगलिक कार्यों का ग्रह भी माना गया है। कुंडली में गुरु ग्रह की शुभ स्थिति स्थिति से जातक को अपार धन संपदा, संतान सुख, सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार और समाज में अच्छा मान-सम्मान मिलता है। गुरु को मीन और धनु राशि का आधिपत्य यानी स्वामी माना गया है। कुंडली के अलग-अलग भावों में गुरु की स्थिति का फल जातकों के जीवन पर पड़ता है। गुरु अब मिथुन राशि में वक्री अवस्था में हैं ऐसे में आइए इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं कि सभी 12 राशियों पर पर गुर के वक्री का क्या प्रभाव होगा।
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Guru Vakri 2024: देवगुरु बृहस्पति हुए वक्री, किसको मिलेगा भाग्य का साथ और किन राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें
Sun, 13 Oct 2024 11:03 AM IST
पं. जयगोविंद शास्त्री ज्योतिषाचार्य
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: पं. जयगोविंद शास्त्री ज्योतिषाचार्य
Updated Sun, 13 Oct 2024 11:03 AM IST
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मिथुन राशि में गुरु ग्रह हुए वक्री
- फोटो : अमर उजाला
- फोटो : amar ujala
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु मिथुन राशि में वक्री होकर आपकी राशि में तीसरे यानी पराक्रम भाव में हैं, ऐसे में आपको अपने साहत और पराक्रम के चलते लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। करियर में बदलाव देखने को मिल सकता है। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि के संकेत हैं।
मेष राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु मिथुन राशि में वक्री होकर आपकी राशि में तीसरे यानी पराक्रम भाव में हैं, ऐसे में आपको अपने साहत और पराक्रम के चलते लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। करियर में बदलाव देखने को मिल सकता है। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि के संकेत हैं।
- फोटो : amar ujala
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु का वक्री मिथुन राशि में दूसरे भाव में हुआ है। ऐसे में आपके खर्चों में बढ़ोतरी के संकेत हैं। नौकरी में बदलाव के योग दिखाई दे रहे हैं और व्यापार के लिहाज से मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा।
वृषभ राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु का वक्री मिथुन राशि में दूसरे भाव में हुआ है। ऐसे में आपके खर्चों में बढ़ोतरी के संकेत हैं। नौकरी में बदलाव के योग दिखाई दे रहे हैं और व्यापार के लिहाज से मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा।
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- फोटो : amar ujala
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए बृहस्पति सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। आपके लिए बृहस्पति का मिथुन राशि में वक्री पहले भाव में हुआ है। ऐसे में आपको खुद पर ज्यादा विश्वास करने का समय है। करियर में ध्यान देने की जरूरत होगी। व्यापार में कुछ अच्छा लाभ हो सकता है, लेकिन आपको ज्यादा धन के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
मिथुन राशि के जातकों के लिए बृहस्पति सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। आपके लिए बृहस्पति का मिथुन राशि में वक्री पहले भाव में हुआ है। ऐसे में आपको खुद पर ज्यादा विश्वास करने का समय है। करियर में ध्यान देने की जरूरत होगी। व्यापार में कुछ अच्छा लाभ हो सकता है, लेकिन आपको ज्यादा धन के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
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कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए बृहस्पति छठे और नौवें भाव के स्वामी होते हैं। बृहस्पति मिथुन राशि में वक्री आपके बारहवें भाव जिसे व्यय और विदेश का भाव कहा जाता है। करियर के लिहाज से गुरु का वक्री होना औसत रहेगा। व्यापार में आपको अपने प्रतिद्वंदियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। अधिक धन खर्च हो सकते हैं।
कर्क राशि के जातकों के लिए बृहस्पति छठे और नौवें भाव के स्वामी होते हैं। बृहस्पति मिथुन राशि में वक्री आपके बारहवें भाव जिसे व्यय और विदेश का भाव कहा जाता है। करियर के लिहाज से गुरु का वक्री होना औसत रहेगा। व्यापार में आपको अपने प्रतिद्वंदियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। अधिक धन खर्च हो सकते हैं।