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ज्योतिष: चार दिन के अंतराल में तीन बड़े ग्रह होंगे वक्री, जानिए क्या होगा इसका असर

Sun, 10 May 2020 07:52 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 10 May 2020 07:52 AM IST
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impact of vakri grah shani shukra guru rahu ketu and budh

शनि की ज्योतिष शास्त्र में बड़ी भूमिका होती है। शनि की चाल में परिवर्तन से बड़ा उथल-पुथल होने लगता है। ग्रहों के न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त करने वाले शनि 11 मई को मकर राशि में वक्री हो रहे हैं। मकर राशि शनि कि स्वयं की राशि है। शनि के वक्री होने के एक दिन बाद ही 13 मई को सुख और ऐश्वर्य प्रदान करने वाले शुक्र भी वृष राशि में वक्री होगा। वृष राशि भी शुक्र ग्रह की स्वयं की राशि है। 14 मई को शुभ ग्रह गुरु भी वक्री होंगे। इसके कुछ दिनों बाद 9 में से 6 ग्रह वक्री अवस्था में रहेंगा। 6 ग्रहों के एक साथ व्रकी होना एक दुर्लभ संयोग है।

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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

शनि, शुक्र, गुरु, राहु-केतु और बुध होंगे वक्री
- तीन बड़े ग्रह शनि, गुरु  और शुक्र के वक्री रहने के बाद कुछ दिन बाद बुध भी वक्री हो जाएगा। जबकि राहु-केतु हमेशा वक्री चाल में रहते हैं। इस तरह एक निश्चित समय के लिए 6 ग्रह एक साथ वक्री में रहेगा।

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ग्रह गोचर

क्या होता है वक्री और मार्गी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल दो तरह की होती है। पहली वक्री और दूसरी मार्गी। व्रकी का अर्थ होता है उल्टा चलना जबकि मार्गी की मतलब सीधे चाल से आगे बढ़ना। ऐसे में कुछ दिनों के लिए कई ग्रह एक साथ वक्री अवस्था में विचरण करेंगे। 25 जून के बाद शुक्र वक्री से मार्गी हो जाएगा।

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मकर राशि में शनि
सभी 12 राशियों पर ऐसे संयोगो का असर

शुभ असर- मेष, कन्या, तुला, मकर  और कुंभ
अशुभ असर-  कर्क, वृष, कन्या और वृश्चिक राशि 
मिलाजुला असर- मिथुन, सिंह, धनु और मीन 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मौजूदा समय में दुनिया कोरोना महामारी की समस्या से जूझ रही है ऐसे में 6 ग्रहों का एक साथ वक्री होना क्या प्रभाव पडेगा।मार्गी का विलोम शब्द वक्री होता है, जिसका अर्थ है पीछे चलना अथवा मुह फेर लेना। इसे आप व्यावहारिक भाषा में  मुंह फेर लेना भी कह सकते हैं। ग्रहों के वक्री होने से संकेत कुछ अच्छे हो सकते हैं।

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