Kundali Dosh Remedies: ग्रहों कि दिशा और दशा के आधार पर कुंडली आपका भविष्य बताती है। कुंडली में ग्रहों की दशा, दिशा और उसकी स्थिति कुंडली शुभ और अशुभ योग बनाती है। जो अशुभ योग होते हैं उन्हें दोष कहते हैं। जैसे काल सर्प दोष, नाड़ी दोष, पितृदोष, श्रापित दोष, मंगल दोष आदि अनेक प्रकार के दोष कुंडली में देखे जाते हैं।
Kundali Dosh: जीवन में ये कुंडली दोष लाते हैं परेशानियां, जानिए प्रभाव और निवारण के उपाय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काल सर्पदोष के प्रभाव
यदि किसी जातक की कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के आधार पर कालसर्प दोष है तो इसका प्रभाव जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है। न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि पेशेवर जीवन में समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। मानसिक अशांति, धन की कमी, संतान होने में समस्या और वैवाहिक जीवन में परेशानियां, कुंडली में काल सर्प दोष प्रभाव के रूप में देखने को मिलती हैं। चूंकि कालसर्प दोष के 12 प्रकार हैं, तो इन दोषों के आधार पर ही प्रभाव भी देखने को मिलता है। साथ ही दोष का प्रभाव राहु और केतु के दशा या अन्तर्दशा के दौरान अधिक बढ़ जाता है। ये प्रभाव इतने शक्तिशाली होते हैं कि व्यक्ति को कई बार आत्महत्या करने के लिए उकसाते हैं। यदि समय पर इस दोष का निवारण न किया जाए तो व्यक्ति को संघर्ष करते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है।
कालसर्प दोष के निवारण के उपाय
- यदि आपकी कुंडली में भी काल सर्प दोष है तो आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं-
- रविवार, पंचमी तिथि और अश्लेषा नक्षत्र के दिन नागराज और अन्य सर्प देवताओं की पूजा करें।
- शनिवार या पंचमी पर 11 नारियल नदी में अर्पित करें।
- अन्न का दान करना उत्तम है, पशुओं को खाना खिलाना, पेड़ों की रक्षा करना भी काल सर्प योग से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा।
- पंचाक्षरी मंत्र, ॐ नमः शिवाय का जाप करें। इसके साथ ही रोजाना नियमित रूप से 108 बार महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- हर शनिवार को पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं।
- किसी पवित्र नदी पर धातु से बने नाग और नागिन के 108 जोड़े चढ़ाएं। काल सर्प दोष को दूर करने में गायत्री मंत्र का जप भी महत्वपूर्ण है।
मांगलिक दोष का प्रभाव
जब किसी की कुंडली के लग्न भाव, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित हो तो कुंडली में मांगलिक दोष लगता है। यह दोष विवाह के लिए बहुत अशुभ माना जाता है। विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में कलह आदि मंगल दोष के सामान्य अशुभ प्रभाव हैं, लेकिन जब इस दोष में प्रबलता हो तब विवाह विच्छेदन की स्थिति बन सकती है। कुछ उपाय करके इस दोष के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। जातक का जीवन मंगल के कारण उतार-चढ़ाव से भरा हो सकता है। मंगल ग्रह विनाशकारी प्रवृत्तियों के लिए भी जाना जाता है, और यह जिस घर में है, उसके लाभकारी प्रभाव को कम करेगा। जिस व्यक्ति की कुंडली मांगलिक दोष होता है, वह शासक की तरह व्यवहार करता है और घर में परेशानियों का कारण बनता है।
मांगलिक दोष निवारण के उपाय
- यदि किसी जातक की कुंडली में मांगलिक दोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है तो उसे निम्न उपाय करने चाहिए-
- प्रतिदिन 108 बार मंगल मंत्र का जाप करें। मंत्र है- ऊँ अं अंगारकाय नम: "या" ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: "
- प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से मांगलिक दोष का प्रभाव काम हो सकता है।
- यदि जातक की कुंडली में मांगलिक दोष ज्यादा प्रबल है तो उसे सोने की धातु में मूंगा रत्न धारण करना चाहिए।
- जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष है उन्हें कुंभ विवाह की सलाह भी दी जाती है।
- मंगलवार को लाल वस्तुओं और मिठाई का दान करना चाहिए।