ज्योतिष विज्ञान में ग्रह गोचर शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। यहां गोचर का सीधा मतलब ग्रह की चाल से है। ग्रह का राशि परिवर्तन (एक राशि से दूसरी राशि में जाना) गोचर कहलाता है। ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु नौ ग्रह हैं। ये गोचर अपनी गति के अनुसार समय-समय पर राशियां बदलते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। सूर्य से लेकर केतु तक सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन का अवधि अलग-अलग होती है।
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क्या होता है ग्रह गोचर, कैसे करता है ये आपके जीवन को प्रभावित
Mon, 20 Apr 2020 07:30 PM IST
रुस्तम राणा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Mon, 20 Apr 2020 07:30 PM IST
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ग्रह गोचर
- फोटो : astrology
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सौरमंडल के ग्रह
- फोटो : Pixabay
ग्रहों के गोचर की अवधि
| ग्रह | गोचर की अवधि |
| सूर्य | एक माह |
| चंद्र | लगभग सवा दिन |
| मंगल | करीब डेढ़ माह |
| बुध | लगभग 14 दिन |
| बृहस्पति | एक साल |
| शुक्र | लगभग 23 दिन |
| शनि | ढ़ाई साल |
| राहु-केतु | एक से डेढ़ वर्ष |
सौरमंडल के ग्रह
- फोटो : Pixabay
सूर्य का गोचर
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
राशि स्वामी- सिंह राशि
कारक- आत्मा का कारक
गोचर का शुभ फल- लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
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चंद्रमा
- फोटो : Pixabay
चंद्रमा का गोचर
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।
राशि स्वामी- कर्क राशि
कारक- मन का कारक
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल
गोचर का अशुभ फल- चौथे, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।
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मंगल देव
- फोटो : अमर उजाला
मंगल का गोचर
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल
राशि स्वामी- मेष और वृश्चिक
कारक- ऊर्जा, साहस और बल
गोचर का शुभ फल- कुंडली में लग्न राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
गोचर का अशुभ फल- बाकी बचे भावों में अशुभ फल