शनि देव अच्छे कार्य करने वालों पर अपनी कृपा करते हैं और अनैतिक कार्य करने वालों को दंड देते हैं। इसलिए उन्हें न्यायधीश न्याय का देवता कहा जाता है। ज्योतिष में भी शनि को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि देव के बारे में मान्यता है कि इनकी शुभ दृष्टि से रंक भी पल भर में राजा बन जाता है और वक्र दृष्टि से राजा भी पल भर में रंक हो सकता है। यही कारण है कि लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रयास करते हैं, लेकिन शनिदेव की पूजा करते समय यदि कुछ बातों को ध्यान में न रखा जाए तो शनिदेव की कृपा के स्थान पर आप उनकी वक्र दृष्टि का शिकार हो सकते हैं।
शनिदेव की पूजा करते समय नहीं रखा इन बातों का ध्यान, तो कृपा के स्थान पर बनना पड़ सकता है वक्र दृष्टि का पात्र
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शनि देव की पूजा करते समय कभी भी उनके ठीक सामने खड़े नहीं होना चाहिए। इसके अलावा भूलकर भी उनकी आंखों में आंखे डालकर नहीं देखना चाहिए। इससे आपको उनकी वक्रदृष्टि का पात्र बनना पड़ सकता है। जिससे आपके जीवन में समस्याएं आती है। लोग कई धूप दीप शनिदेव के ठीक सामने जलाते हैं लेकिन दीप हमेशा मंदिर में रखी शिला पर ही जलाना चाहिए।
शनिदेव की पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कभी भूलकर गलती से भी गंदे वस्त्र पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो शनिदेव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही शनिदेव की पूजा करते समय हमेशा नीले या फिर कालेरंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
सभी देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजन करना शुभ माना जाता है, लेकिन शनिदेव की पूजा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए। शनिदेव को पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है।
शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्योदय से पहले या फिर सूर्योदय के बाद की जाती है। इसी तरह से शनिदेव की पूजा में तांबे के पात्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि तांबे को सूर्य की धातु माना गया है। मान्यतानुसार इससे शनिदेव नाराज होते हैं। शनिदेव की पूजा में लोहे की धातु के बर्तनों का प्रयोग करना सही रहता है।