विजयादशमी का महत्व Dussehra 2020 Importance
Dussehra 2020: राहु के कारण पतन की राह पर दौड़ा रावण, जानिए विजयादशमी शुभ मुहुर्त और महत्व
पूजा के लिए श्रेष्ठ अभिजित मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 49 मिनट से 01 बजकर 34 मिनट तक।
इस दिन विजय मुहूर्त का आरम्भ- दोपहर 1 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 40 मिनट तक।
शस्त्रपूजा अपराजिता पूजा शिव मूहूर्त में- स्थानीय शायंकालीन प्रदोषकाल में करना श्रेष्ठ
रावण की कुंडली का विश्लेषण
रावण की जन्मकुंडली सिंह लग्न की है, कहीं-कहीं रावण की जन्म कुंडली को तुला लग्न में जन्म लेने का वृतांत भी आया है किंतु सिंह लग्न की कुंडली का प्रभाव रावण के जीवन में सर्वाधिक रहा है। अतः फलित ज्योतिष के विद्वान रावण की जन्म कुंडली को सिंह लग्न का ही मानते हैं। रावण की कुंडली के लग्न में ही सूर्य और वृहस्पति, द्वितीय भाव में उच्च राशि पर बुध, तृतीय पराक्रम भाव में उच्च राशि में शनि, और पंचम विद्या भाव में राहु बैठे हुए हैं, छठे भाव में मंगल, एकादश लाभ भाव में केतु और द्वादश भाव में चंद्र और शुक्र बैठे हैं दोनों जन्म कुंडलियों में बड़े-बड़े योगों की भरमार है।
Navratri 2020: 25 अक्तूबर को सभी कामनाओं की सिद्धि करने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा
लंकापति रावण की जन्म कुंडली में सूर्य, बुध, शनि, मंगल और चंद्रमा अपने अपने उच्च भाव में बैठे हुए हैं। रावण की जन्मकुंडली में जितने भी ग्रह अपने अपने घर में बैठे हैं वह अपने शुभ प्रभाव में ही बढ़ोतरी कर रहे हैं सूर्य और बृहस्पति का लग्न में बैठना रावण के महान विद्वान होने की तरफ संकेत दे रहा है। किन्तु पंचम विद्या भाव में राहु से ग्रसित है अतः संतान संबंधी चिंता की वृद्धि का परिचायक तो है ही।
रावण की कुंडली में राहू
जातक बुद्धि का प्रयोग गलत एवं अनैतिक कार्यों में करता है। फलित ज्योतिष में यदि किसी भी जातक की जन्म कुंडली में विद्या भाव में राहू हो और शत्रुक्षेत्री हो तो वह व्यक्ति अपने विवेक का उपयोग गलत कार्यों में करता है। बड़े-बड़े ग्रह योगों के बावजूद राहू ने रावण की बुद्धि भ्रमित कर दी इसलिए रावण का पतन हुआ।