शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। शनि की टेढ़ी नजर जिस किसी भी जातक पर पड़ती उसके साथ कई तरह की परेशानियां आनी शुरू हो जाती है। इसलिए शनि का नाम आते ही लोगों के हाथ पैर फूलने लगते हैं। शनि को न्याय का देवता माना गया है। शनिदेव लोगों को कर्मों के अनुसार दंड या पुरस्कार देते हैं। शनिदेव जिस किसी पर मेहरबान होते हैं उसके जीवन को खुशियों और सौभाग्य से भर देते हैं। वहीं अगर किसी जातक के जीवन में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या लग जाती तो उसके साथ सभी तरह की मुसीबतें घेर लेती हैं।
क्रूर शनि भी ऐसे लोगों के जीवन में भर देते हैं खुशियां, शनि को शुभ बनाने के कुछ उपाय
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ज्योतिषशास्त्र में शनि
ज्योतिष में शनि का काफी महत्व होता है। किसी जातक की खुशियां और मुसीबतें उसकी कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है। शनि किसी भी राशि में करीब साढ़े सात साल तक रहते हैं। कुल 12 राशियों के एक बार चक्कर काटने में शनि को 30 वर्षों का समय लगता है। यानी शनि अगर किसी एक राशि में आ गए है तो दोबारा 30 वर्षों के बाद ही लौटकर आते हैं। शनि बहुत ही धीमी गति से चलते हैं ये एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करने के लिए ढ़ाई वर्षो का समय लेते है। इस प्रकार सभी 12 राशियों में जाने के लिए उन्हें 30 वर्ष लग जाते हैं। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में एक बार शनि की साढ़ेसाती जरूर लगती है।
शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में जो जातक अपने जीवन में अच्छे कर्म करते हैं शनि देव उन पर मेहरबान होते हैं और उसे जीवन को हर तरह की खुशियों से भरकर रख देते हैं। आइए जानते हैं किसी भी जातक के जीवन में क्रूर ग्रह होने के बावजूद कब-कब खुशियां भरते हैं।
ज्योतिष में कुंडली के अध्ययन के आधार पर किसी जातक की कुंडली में शनि तीसरे, छठें, दसवें और ग्यारहवें भाव में होने पर यह जातक के जीवन में काफी खुशहाली लाते हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किसी जातक के जीवन में शनि सबसे ज्यादा शुभ और बलवान 36 और 42 वर्ष की उम्र में होते हैं। इस उम्र में अगर शनि जातक की कुंडली में शुभ भाव में बैठे तो उन्हें कई तरह की सफलताएं प्राप्त होती हैं।