MP Politics: आदिवासी वोट साधने के लिए BJP का प्लान, रानी दुर्गावती की गौरव यात्रा, PM की उपस्थिति में समापन
22 जून को प्रदेश के पांच अंचलों से वीरागंना रानी दुर्गावती गौरव यात्रा बालाघाट से शहडोल के लिए प्रारंभ होगी। इसका शुभारंभ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे।
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मध्य प्रदेश में नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव है। इन चुनावों में भाजपा विंध्य के साथ ही आदिवासी वोटरों को साधने में हर कोशिश कर रही है। इसके लिए अब भाजपा ने बड़ा प्लान बनाया है। भाजपा 22 जून को प्रदेश के पांच अंचलों से वीरांगना रानी दुर्गावती गौरव यात्रा प्रारंभ कर रही है। इन यात्रा का समापन 27 जून को शहडोल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में दो वंदेभारत ट्रेन भोपाल-इंदौर और भोपाल-जबलपुर का शुभरंभ करेंगे। साथ ही भाजपा के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री शहडोल में वीरागंना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस कार्यक्रम और वीरांगना रानी दुर्गावती गौरव यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
अमित शाह करेंगे यात्रा का शुभारंभ
22 जून को प्रदेश के पांच अंचलों से वीरागंना रानी दुर्गावती गौरव यात्रा बालाघाट से शहडोल के लिए प्रारंभ होगी। इसका शुभारंभ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे। इसके अलावा छिंदवाड़ा से यात्रा सांसद दुर्गादास उईके, सिंगरामापुर में नबतरी से मंत्री विजय शाह, रानी दुर्गावती के जन्मस्थान कालिंजर में संपतिया उईके और धोहनी सीधी में हिमाद्रि सिंह गौरव यात्रा का शुभारंभ करेंगी। यह यात्रा गांव-गांव होते हुए 27 जून को शहडोल पहुंचेगी। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में यात्रा का समापन होगा।
यात्रा इस रूट से पहुंचेगी शहडोल
पहला- बालाघाट से यात्रा बैहर, बिछिया, डिंडोरी, पुष्पराजगढ़, अनूपपुर,जैतपुर।
दूसरा - छिंदवाड़ा से चौरई, सिवनी, क्योलारी, लखनादोन, मंडला, निवास, शहपुरा, उमरिया, पाली (मानपुर)।
तीसरा - सिंगरामपुर (जबेरा/दमोह) से यात्रा मझौली (पाटन), सिहोरा शहर, जबलपुर शहर, बरगी समाधी (पनागर विधानसभा), कुंडम (सिहोरा विधानसभा), शहपुरा(डिंडोरी जिला), बिससिंगपुर पाली।
चौथा - कलिंजर फोर्ट (उत्तरप्रदेश) से अजयगढ़, पवई, बड़वारा, विजयरावगढ़, अमरपुर, मानपुर।
पांचवा - सीधी कुसमी से ब्योहारी, जय सिंह नगर।
यह है आदिवासी वोट का गणित
मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 47 सीटे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 30 और भाजपा को 16 सीट पर जीत मिली थी। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इसके अलावा 30 सीटों पर आदिवासी वोटर प्रभाव रखता है। इसलिए कहा जाता है कि आदिवासी वोट जिधर गया, सिंहासन पर पहुंचा। अब भाजपा, कांग्रेस के अलावा दूसरी अन्य पार्टियां भी आदिवासी वर्ग को साधने में जुटे हुए है। यहीं वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पूरी ताकत लगा रहे है। सरकार आदिवासियों को साधने के लिए पेसा एक्ट से लेकर कई योजनाओं का शुभारंभ किया है। वहीं, कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का रूट आदिवासी वोटर को साधने के हिसाब से तय किया था। हाल ही में प्रियंका गांधी ने भी जबलपुर में कांग्रेस की जनसभा को संबोधित करने से पहले रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
आदिवासी सीटों पर ऐसे बदले समीकरण -
2003 विधानसभा चुनाव- आदिवासियों के लिए 41 सीट रिजर्व थी। इसमें से भाजपा ने 37 सीटें जीती थी। जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीट पर सिमट गई थी। इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने दो सीट जीती थी।
2008 विधानसभा चुनाव- आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर 47 हो गई। इसमें भाजपा ने 29 सीटें जीती। वहीं, कांग्रेस की सीटें बढ़कर 17 पहुंच गई।
2013 विधानसभा चुनाव- 47 सीटों में से भाजपा ने 31 सीटें जीती। वहीं, कांग्रेस की सीटें बढ़कर 15 पहुंच गई।
2018 विधानसभा चुनाव- 47 आरक्षित सीटों में से कांग्रेस ने 30 सीटें जीती, भाजपा को सिर्फ 16 सीटें ही मिली। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता।
विंध्य पर इसलिए फोकस
भाजपा विंध्य में मजबूत है। यहां पर 2018 में भाजपा को 30 में से 24 सीट मिली थी। लेकिन अब यहां पर उथल पुथल मच गई है। भाजपा अपने वजूद को खोना नहीं चाहती है। यहीं वजह है कि दो महीने के अंदर प्रधानमंत्री विंध्य में दूसरी बार पहुंच रहे है। शहडोल आदिवासी बहुल इलाका है। भाजपा प्रधानमंत्री को आगे कर आदिवासी वोट बैंक को साधने के प्रयास में है। शहडोल के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सिकलसेल एनीमिया बीमारी से मुक्ति के कार्यक्रम को लांच करेंगे। साथ ही मध्य प्रदेश में एक करोड़ आयुष्मान कार्ड का प्रतीकात्मक रूप से वितरण करेंगे।
जयस भी बढ़ा रहा मुश्किल
मध्य प्रदेश में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) का जनाधार भी तेजी से बढ़ रहा है। संगठन ने युवाओं को आदिवासी प्रभाव वाली 80 सीटों पर चुनाव लड़ाने का एलान किया है। इसके लिए संगठन लगातार जमीनी स्तर पर काम करते आ रहा है। जयस का बढ़ता जनाधार भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत बन रहा है।