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रिपोर्ट: महिलाओं को कमतर आंकती हैं इस बोर्ड की किताबें
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:20 AM IST
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- फोटो : getty
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दुनिया इस सत्य को स्वीकार कर रही है कि समाज के उत्थान में पुरुषों की तरह महिलाओं के योगदान की भी उतनी ही जरूरत है। जैसे-जैसे समाज शिक्षित हो रहा है, महिलाओं को समाज में बराबरी के दर्जे पर देखा जाने लगा है। पीएम मोदी भी देश में बेटियों-महिलाओं को आगे लाने की बात प्रमुखता से करते हैं। लेकिन उन्हीं की सरकार के इकबाल में पल रहा राजस्थान किताबों में बच्चों को ये शिक्षा दे रहा है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है।
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बेहद चौंकाने वाली बात दिल्ली और राजस्थान के एकेडमिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट से सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक राजस्थान की किताबें पुरुषों को हीरो दर्शाती हैं, जबकि महिलाओं को जीरो!
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किताबों में वीरता, साहस और तमाम तरह के गुणों की बात पुरुषों के लिए की गई हैं, जबकि महिलाओं की उपेक्षा दिखती है।
कक्षा 3 की हिंदी किताब में एक पाठ का नाम 'खेल' हैं। इस पाठ में केवल लड़कों की तस्वीर ही छपी है, लड़कियां कहीं नजर नहीं आती हैं। इससे असमानता का भाव उत्पन्न होता है, और ये दर्शाता है कि खेल केवल लड़कों के लिए ही बने हैं।
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किताबों में दर्शाया गया है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है!
- फोटो : getty
जानकारों की मानें तो सबसे चौकाने वाली बात कक्षा आठ की एक किताब से सामने आती है। सिंधी कवि 'संत कांवर राम' नामक पाठ में बताया गया है कि पुरुषों की हर बात मानना महिलाओं का कर्तव्य है और उन्हें पुरुषों के हिसाब से ही रहना चाहिए।
पाठ में बताया गया है कि कवि की पहली पत्नी की मौत के बाद उसने 46 साल की उम्र में दूसरी शादी की। दोनों पत्नियों से उसके तीन-तीन बच्चे हुए। पाठ का सीधा मतलब है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है।
वहीं, जानकार ये भी बताते हैं कि कक्षा 6 की किताब में 'गुलाब सिंह' नामक पाठ में बेटी विरोध प्रदर्शन में जाना चाहती है तो उसकी इच्छा को दबाकर लड़को को भेजा जाता है। बेटे की हत्या हो जाती है, तब बाद में बेटी को भेजा जाता है। जानकारों की मानें तो साहस, वीरता, हिम्मत आदी की बात आने पर किताबों में पुरुषों को प्राथमिका दी गई है।
पाठ में बताया गया है कि कवि की पहली पत्नी की मौत के बाद उसने 46 साल की उम्र में दूसरी शादी की। दोनों पत्नियों से उसके तीन-तीन बच्चे हुए। पाठ का सीधा मतलब है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है।
वहीं, जानकार ये भी बताते हैं कि कक्षा 6 की किताब में 'गुलाब सिंह' नामक पाठ में बेटी विरोध प्रदर्शन में जाना चाहती है तो उसकी इच्छा को दबाकर लड़को को भेजा जाता है। बेटे की हत्या हो जाती है, तब बाद में बेटी को भेजा जाता है। जानकारों की मानें तो साहस, वीरता, हिम्मत आदी की बात आने पर किताबों में पुरुषों को प्राथमिका दी गई है।