भारत पर था कब्जे का सपना, कैसी दुनिया बनाना चाहता था बगदादी और क्या थी उसकी योजना?
- आईएस भारत ही नहीं रोम पर भी चाहता था कब्जा
- आईएस चाहता था विश्व में बगदादी की विचारधारा फैले
- युवकों को हूर और जन्नत मिलने के सपने दिखाए
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विस्तार
दुनिया पर अपनी हुकूमत चाहने वाला आतंकवादी संगठन आईएस का मुखिया अबु बकर अल-बगदादी अब नहीं रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टी करते हुए कहा कि वह कुत्ते की मौत मारा गया। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब उसकी मौत की खबर आई है। इससे पहले 2014, 2015, 2016, और 2017 में भी उसकी मौत की खबरें आई थीं। हालांकि हर बार आईएस ने बगदादी की मौत की खबर को नकार दिया था।
भारत पर चाहता था कब्जा
इस्लामिक स्टेट यानी आईएस ने जब पहली बार अपना घोषणा पत्र जारी किया था तब उसमें भारत एक मुख्य टार्गेट देश था। संगठन पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को कब्जाना चाहता था। बगदादी की विचारधारा को दुनिया में फैलाना चाहता था। उसका लक्ष्य रोम पर भी कब्जा करना था। वह रोम को इस्लाम और ईसाई धर्म के बीच संघर्ष के शहर के तौर पर देखता था। उसे लगता था कि ईसाई धर्म का खात्मा इस्लाम को फैलाने के लिए जरूरी है।
संगठन ऐसे करता था काम
बगदादी का संगठन मारो, भागो और छुपो की रणनीति के तहत काम करता है। संगठन का मकसद था कि आतंकियों की तलाश में लाखों-करोड़ों रुपये फूंके जाएं। वह काफी हद तक इसमें कामयाब भी रहा। बेल्जियम में हमले के बाद कामकाज ठप पड़ा था और देश को रोजाना 5 करोड़ 30 लाख यूरो का नुकसान हुआ था।
युवाओं की फौज तैयार करने के लिए बगदादी ने युवकों को हूर और जन्नत मिलने के सपने दिखाए थे। कई उसके झांसे में आए, लेकिन धीरे-धीरे असलियत सामने आती गई। हालात यह हैं कि अब उसे जबरन लड़ाकों को कैदी बनाकर रखना पड़ रहा है।
कौन है बगदादी, ये रहा कच्चा चिट्ठा
- 29 जुलाई 1971 को इराक के सामर्रा में जन्मा।
- बगदाद के इस्लामी विज्ञान विश्वविद्यालय से इस्लामी विज्ञान में मास्टर डिग्री फिर पीएचडी किया।
- 04 अक्तूबर 2011 को अमेरिका ने प्रतिबंधित सूची में शामिल करते हुए एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया।
- 16 दिसंबर 2016 को राशि बढ़ाकर ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर कर दी गई। 2003 में अमेरिकी आक्रमण के दौरान उसने अमेरिकी फौज के खिलाफ लड़ा।
- 2005 से 2009 तक जेल में रहा। 2010 में वह अलकायदा का कमांडर बन गया और 2014 में बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया।