बिहारी बाबू बोले, कंपाउंडर के लायक नहीं था, स्वास्थ्य मंत्री बन गया
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बीजेपी सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्ह ने एक साहित्य सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि "मैं तो कंपाउंडर बनने के लायक भी नहीं था, लेकिन देश का स्वास्थ्य मंत्री बना ।" रविवार को गुवाहाटी में साहित्य सम्मेलने में बातचीत के दौरान ये बातें कही।
शत्रुघन सिन्हा ने सभी लोगों से मिले सम्मान, इज्जत और प्यार का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे मुंबई कोई बड़ा और जगमगाता हुआ सितारा बनने नहीं आए थे, बल्कि कड़ी मेहनत करके एक अभिनेता बनने आए थे। अपनी जीवनी "खामोश" का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ये उनके जीवन पर आधारित एकदम सच्ची, ईमानदार और पारदर्शी किताब है।
उन्होंने कहा कि "ये किताब सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि इसमें कोई सनसनी नहीं है और न ही इसमें किसी महिला की भावना को ठेस पहुंचाई गई है।" अपने जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए सिन्हा ने बताया कि कई बार कुछ लोगों ने उन्हें चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी कराने के सुझाव दिये, जिससे वे सुन्दर लगें, पर देवानंद के रोकने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
शत्रुघन सिन्हा ने बताया कि देव साहब ने उनसे कहा ऐसा मत करना, तुम जैसे हो वैसे रहो, और तब मैंने दुनिया को बताया मैं जैसा हूं मुझे वैसे ही स्वीकार करो, फिर मैंने अपने हुनर और व्यक्तित्व को संवारना शुरु किया। मेरा युवाओं को यही सुझाव है "कि सर्वश्रेष्ठ से भी बेहतर हो या खुद को सर्वश्रेष्ठ से अलग साबित करने की कोशिश करो...।
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शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि खामोश एक भड़काऊ शब्द कैसे अब एक प्यारे शब्द में बदल जाता है, निर्भर करता है आप उसे कैसे कहते हैं। दूसरों की नकल मत करो अपनी खुद की भूमिका करो।
राजनीति में आने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि समाज के लिए कुछ करने और अपना सामाजिक कर्तव्य पूरा करने के लिए वे राजनीति में आए।
उन्होनें आगे कहा कि 'रील लाइफ के स्टारडम की उंचाईयों से खिसक कर रियल लाइफ में जमीनी स्तर पर काम करना आसान नहीं होता। इस दौरान कई उपहासों, उपेक्षाओं, तिरस्कारों और दमन का सामना करना पड़ता है, और जब आप उनका सामना करके आगे बढ जाते हैं तब आपका जुनून आपको इज्जत दिलाता है।"