बुराड़ी मिस्ट्री: महज आधे घंटे के भीतर तबाह हुआ भाटिया खानदान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा
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पोस्टमार्टम में भाटिया परिवार के 10 सदस्यों की मौत फंदा (हैंगिंग) से होने की पुष्टि के बाद नया खुलासा सामने आया है। इसी रिपोर्ट में परिवार के सभी सदस्यों की मौत का जिक्र भी किया है। इसके अनुसार महज आधे घंटे के भीतर ललित और उसके भाई भूपी का पूरा खानदान काल की चपेट में आया। रात एक से लेकर डेढ़ बजे तक एक-एक करके सभी लोग मरते चले गए। गौर करने वाली बात है कि सबसे आखिर में नीतू और शिवम की मौत होने का अनुमान भी फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने लगाया है। इनका कहना है कि दोनों को स्पॉइनल बोन ऑफ नेक टूटी नहीं थी।
पहचान छिपाने की शर्त पर अमर उजाला से एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि शनिवार रात एक से डेढ़ बजे के बीच परिवार के सभी सदस्यों की मौत हुई है। पोस्टमार्टम के दौरान नीतू और शिवम की गले की हड्डी टूटी नहीं मिली है। इसका मतलब यह है कि फंदा लगाने के बाद इनके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हुई है।
मस्तिष्क में जब ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है तो धीरे धीरे फंदे पर लटका व्यक्ति मौत की ओर बढ़ता है। उन्होंने ये भी बताया कि सामान्य तौर पर फांसी का फंदा लगाने के बाद एक से छह मिनट के भीतर मृत्यु होती है। हालांकि कई बार 20 सेंकड में भी इंसान मर सकता है। इसके लिए कई फैक्टर फॉरेसिंक मेडिसिन में दर्ज हैं।
वहीं दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भाटिया परिवार की मौत शनिवार रात करीब एक से दो बजे के बीच ही हुई है।
मोटी गर्दन से भी लगाया जा सकता है अनुमान
एक सवाल पर फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि कई बार गर्दन के आकार से भी हड्डी टूटे जाने का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि इसका जवाब कई फैक्टर को देखकर दिया जाता है। गर्दन और व्यक्ति का आकार, मरीज की कमजोर हड्डियां इत्यादि फैक्टर देखे जाते हैं। ठीक इसी तरह अक्सर लोग फांसी पर लटकने को गले के निशान से जोड़कर देखने लगते हैं लेकिन शायद उन्हें नहीं पता कि यह फंदा जिस चीज से लगाया जाता है उस पर निर्भर करता है। कई बार मुलायम कपड़ा या अन्य चीज से फंदा लगाने के बाद निशान नहीं आता।