बेटी बोली- 'मेरे पापा के मरने पर तो ये इल्जाम हटा लो'
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ग्वालियर की रहने वाली कक्षा 11 की छात्रा स्वाति आर्य अब सिर्फ़ दूसरों को स्कूल जाते देख रहीं हैं। यही हाल उनके तीन और भाई-बहनों का है जो सब शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते हैं।
इनके पिता डॉक्टर राजेंद्र आर्य की 'आकस्मिक' मृत्यु पिछले महीने ही हुई है और उनके घर में मातम छाया हुआ है। मध्य प्रदेश के व्यापमं फ़र्ज़ी भर्ती घोटाले में राजेंद्र आर्य को अभियुक्त बनाया गया था और उन्हें साढ़े छह महीने जेल में बिताने पड़े थे।
राजेंद्र आर्य मध्य प्रदेश सागर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर थे और मई 2013 में उन्हें गिरफ़्तार किया गया था। उन पर प्रदेश मेडिकल प्रवेश परीक्षा के दौरान कथित तौर से 'छात्रों को नकल में मदद कराने' का आरोप लगा था।
लेकिन पत्नी उषा आर्य कहतीं हैं कि उनके पति निर्दोष थे और उन्हें फंसाया गया था। वो कहती हैं, "ज़मानत पर बाहर आने के बाद भी एसटीएफ़ वाले इन्हें परेशान करते रहे। सस्पेंड तो पहले ही हो गए थे इसलिए तनख़्वाह भी आधी मिल रही थी, वो काफ़ी तनाव में चल रहे थे।"
बीवी के सामने परिवार को पालने का संकट
पत्नी उषा आर्य के सामने अब चुनौतियों का पहाड़ है। बच्चों के एडमिशन की तारीख़ निकल चुकी है और स्कूल बंद हो गए हैं। हालांकि थोड़ी हैरानी की बात ये निकली की राजेंद्र आर्य के चारों बच्चे एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते हैं, जिसमें प्रति छात्र सालाना फ़ीस लगभग एक लाख 20 हज़ार रुपए है।
थोड़ी तफ़्तीश करने पर पता चला कि मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर का वेतनमान 70,000-80,000 रुपए प्रति माह के करीब होता है।
एक सामान्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र आर्य का ग्वालियर के सारिका नगर में दो मंजिला मकान भी है, जिसके लिए बैंक में प्रति माह किस्त भी जाती है। लेकिन पत्नी और रिश्तेदारों के मुताबिक़, डॉक्टर आर्य बेहद ईमानदार थे और उन्हें ‘किसी दूसरे ने फंसा दिया’।
परिजनों के अनुसार 27 जून को उन्हें बुखार आया और ग्वालियर के बिड़ला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अचानक तबियत बिगड़ने पर बिड़ला अस्पताल वालों ने उन्हें किसी बेहतर जगह ले जाने की सलाह दी।
ग्वालियर मेडिकल अस्पताल में अगले दिन राजेंद्र आर्य की मौत हो गई। जांच कर रही स्पेशल टास्क फ़ोर्स की सूची के अनुसार, "व्यापमं घोटाले में आरोपी राजेंद्र आर्य की भूमिका रैकेटियर की थी और 39 वर्ष की आयु में लीवर इन्फेक्शन के कारण उनकी मौत हुई।"
क्या थी उनकी भूमिका?
हालांकि डॉक्टर राजेंद्र आर्य की मौत के साथ ही उन पर लगे आरोप भी बेमानी हो गए हैं। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई वे सभी मध्य प्रदेश में प्री मेडिकल टेस्ट, प्री इंजीनियरिंग टेस्ट और सरकारी नियुक्तियों वाली परीक्षाओं में कथित धांधली में लिप्त थे।
एसटीएफ़ जांच पर निगरानी रखने वाली एसआईटी के प्रमुख जस्टिस चंद्रेश भूषण ने बीबीसी को बताया, "अगर एसटीएफ़ ने किसी को हिरासत में लेकर जेल में रखा तो ये बिना सुबूत मुमकिन ही नहीं है, क्योंकि इन्हें अदालत के सामने रखा जाता है।"
उन्होंने कहा, "हम लोग जांच प्रक्रिया से संतुष्ट रहे हैं।" इस बीच राजेंद्र आर्य की मौत के बाद पत्नी उषा आर्य ने खाना-पीना कम कर रखा है। बच्चों की बस एक ही इच्छा है, "मरने के बाद पापा पर से इल्ज़ाम तो हटा लें।"
