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एमपी: पूर्व अपर कलेक्टर अनिल डामोर का हार्ट अटैक से निधन, नई जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने वाले थे भोपाल
Tue, 08 Sep 2026 03:08 PM IST
विदिशा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा
Published by: विदिशा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:08 PM IST
सार
विदिशा के पूर्व अपर कलेक्टर और 2019 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल कुमार डामोर का मंगलवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें विदिशा मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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आईएएस अधिकारी अनिल कुमार डामोर का हार्ट अटैक से निधन हो गया
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
विदिशा के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। जिले के पूर्व अपर कलेक्टर और 2019 बैच के युवा आईएएस अधिकारी अनिल कुमार डामोर का मंगलवार सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया। सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें तत्काल अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके असामयिक निधन से पूरे प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई है।
सीने में उठा तेज और बिगड़ गई तबीयत
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह अनिल डामोर अपने घर पर ही थे। तभी अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें तुरंत विदिशा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक को मौत का कारण बताया है। मेडिकल कॉलेज में ही उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया। खबर फैलते ही कलेक्टर कार्यालय से लेकर मेडिकल कॉलेज तक अधिकारियों और कर्मचारियों का तांता लग गया। हर कोई स्तब्ध था कि कल तक जो अफसर सबके साथ हंस-बोल रहा था, वह आज अचानक इस दुनिया को छोड़कर चला गया।
नई जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने वाले थे भोपाल
अनिल कुमार डामोर हाल ही तक विदिशा में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। उनके काम की सराहना पूरे जिले में होती थी। इसी महीने राज्य शासन ने उनका तबादला भोपाल स्थित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर किया था। वे विदिशा का चार्ज देकर भोपाल में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में ही थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। नई पारी शुरू करने से पहले ही उनके जीवन की पारी खत्म हो गई।
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ये भी पढ़ें- 'मंदिर टूट गया, पर हनुमान जी टस से मस न हुए': उज्जैन में प्रशासन पस्त, संत बोले- यह चमत्कार नहीं तो क्या है?
कर्मचारी बोला- हमने अफसर नहीं, बड़ा भाई खोया
सहकर्मियों के मुताबिक, अनिल डामोर सिर्फ एक अफसर ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन इंसान भी थे। उनका स्वभाव बेहद हंसमुख और मिलनसार था। वे छोटे से छोटे कर्मचारी से भी बड़े प्यार और सम्मान से बात करते थे। उनके व्यवहार में कभी भी अफसरी का घमंड नहीं दिखा। यही वजह थी कि विदिशा में उन्होंने कम समय में ही सबके दिलों में अपनी अलग जगह बना ली थी।मेडिकल कॉलेज परिसर में मौजूद उनके साथी कर्मचारी नम आंखों से उनके साथ बिताए पलों को याद कर रहे थे। एक कर्मचारी ने कहा, 'हमने एक अफसर नहीं, अपना बड़ा भाई खोया है।'
झाबुआ के रहने वाले थे डामोर
अनिल कुमार डामोर मूल रूप से झाबुआ जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। उनका बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है, जबकि बेटी छोटी है। पिता की अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है।
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सीने में उठा तेज और बिगड़ गई तबीयत
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह अनिल डामोर अपने घर पर ही थे। तभी अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें तुरंत विदिशा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक को मौत का कारण बताया है। मेडिकल कॉलेज में ही उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया। खबर फैलते ही कलेक्टर कार्यालय से लेकर मेडिकल कॉलेज तक अधिकारियों और कर्मचारियों का तांता लग गया। हर कोई स्तब्ध था कि कल तक जो अफसर सबके साथ हंस-बोल रहा था, वह आज अचानक इस दुनिया को छोड़कर चला गया।
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नई जिम्मेदारी संभालने के लिए जाने वाले थे भोपाल
अनिल कुमार डामोर हाल ही तक विदिशा में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। उनके काम की सराहना पूरे जिले में होती थी। इसी महीने राज्य शासन ने उनका तबादला भोपाल स्थित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर किया था। वे विदिशा का चार्ज देकर भोपाल में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में ही थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। नई पारी शुरू करने से पहले ही उनके जीवन की पारी खत्म हो गई।
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कर्मचारी बोला- हमने अफसर नहीं, बड़ा भाई खोया
सहकर्मियों के मुताबिक, अनिल डामोर सिर्फ एक अफसर ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन इंसान भी थे। उनका स्वभाव बेहद हंसमुख और मिलनसार था। वे छोटे से छोटे कर्मचारी से भी बड़े प्यार और सम्मान से बात करते थे। उनके व्यवहार में कभी भी अफसरी का घमंड नहीं दिखा। यही वजह थी कि विदिशा में उन्होंने कम समय में ही सबके दिलों में अपनी अलग जगह बना ली थी।मेडिकल कॉलेज परिसर में मौजूद उनके साथी कर्मचारी नम आंखों से उनके साथ बिताए पलों को याद कर रहे थे। एक कर्मचारी ने कहा, 'हमने एक अफसर नहीं, अपना बड़ा भाई खोया है।'
झाबुआ के रहने वाले थे डामोर
अनिल कुमार डामोर मूल रूप से झाबुआ जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। उनका बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है, जबकि बेटी छोटी है। पिता की अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है।
