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वंदे मातरम पर कमलनाथ का यू-टर्न, अब कर्मचारियों के साथ नागरिक भी होंगे शामिल

Thu, 03 Jan 2019 12:21 PM IST
यशवीर सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: यशवीर सिंह Updated Thu, 03 Jan 2019 12:21 PM IST
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Vande Mataram: Kamal Nath takes u turn on his earlier order, civilians will also sing national song
कमलनाथ - फोटो : social media

मध्यप्रदेश में साल 2005 में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वंदे मातरम गाने की परंपरा शुरू की थी। सरकारी कर्मचारी महीने के पहले कार्यदिवस पर राष्ट्रीय गीत गाया करते थे। इस परंपरा को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद खत्म करने का आदेश दिया था। जिसपर की भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि वह इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेंगे। अमित शाह ने भी राहुल गांधी से पूछा था कि क्या यह उनका आदेश है।

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काफी विरोध के बाद कमलनाथ सरकार ने यू टर्न लेते हुए आदेश वापस ले लिया है। सरकार का कहना है कि अब केवल सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि आम जनता भी वंदे मातरम गाएगी। इसके लिए पुलिस बैंड का मार्च निकाला जाएगा। जिसमें आगे बैंड, पीछे कर्मचारी और सबसे पीछे आम जन शामिल होंगे। यह कार्यक्रम महीने के पहले कार्यदिवस पर आयोजित किया जाएगा।

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वंदे मातरम को लेकर विवाद की शुरुआत नए साल पर हुई थी जब कमलनाथ ने हर महीने की एक तारीख को मंत्रालय में गाए जाने वाले वंदे मातरम को बंद करने का फैसला लेकर सियायत गर्म कर दी थी। इस परंपरा के तहत मंत्रालय के सभी कर्मचारी महीने की पहली तारीख को परिसर में इकट्ठा होकर एकसाथ मिलकर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया करते थे। इससे पहले भी वंदे मातरम को लेकर सियासत होती रही है।

क्या है पूरा मामला

एक जनवरी मंगलवार को वंदे मातरम का गायन होना था। मगर इसकी सूचना न तो बैंड वालों को और न ही कर्मचारियों को दी गई। जबकि सामान्य प्रशासन एक हफ्ते पहले ही इसकी रूपरेखा तय करने के साथ गायन के लिए मुख्य अतिथि का भी निर्धारण करता था। कांग्रेस सरकार के इस कदम ने राज्य की सियासत में भूचाल लाने का काम किया। भाजपा ने कांग्रेस पर तुरंत हमला बोलते हुए पूछा कि क्या अब भारत माता की जय बोलने से भी रोका जाएगा।

कांग्रेस सरकार द्वारा वंदे मातरम् का गायन बंद करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस बारे में बात करेंगे। इसे बंद करना ठीक नहीं है। सियासी घमासान मचने पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल को वंदेमातरम की फाइल सहित बुलाया। थोड़ी देर बाद मुख्य सचिव एसआर मोहंती भी वहां पहुंचे।

फाइल में गायन के शुरू किए जाने से लेकर अभी तक का ब्यौरा दिया गया था। अधिकारियों की तरफ से मुख्यमंत्री को तर्क दिया गया कि मंत्रालय में 3,000 कर्मचारी और अधिकारी हैं जिसमें से मुश्किल से 200-300 लोग गायन के लिए पहुंचते हैं। ऐसी राष्ट्रवादिता का क्या मतलब है? कमलनाथ सरकार सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगान को अनिवार्य करने की तैयारी में है। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार इसपर फैसला करके लागू करेगी।


इसके बाद सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने एलान किया था कि भाजपा के सारे विधायक सचिवालय में वंदे मातरम गाएंगे। उन्होंने कहा था, 'हमारे सभी 109 विधायक 7 जनवरी 2019 को मध्यप्रदेश सचिवालय में वंदे मातरम गाएंगे।' वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने ट्वीट करते हुए कहा था कि राष्ट्र गीत गाए जाने की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग की है जो फिलहाल सीएम के पास है।
 

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