फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   UPA will come on power again

कांग्रेस को अब भी भरोसा, बनेगी तीसरी बार सरकार

Wed, 26 Mar 2014 09:10 AM IST
Updated Wed, 26 Mar 2014 09:10 AM IST
विज्ञापन
UPA will come on power again

इंदिरा गांधी जब 1980 में कमलनाथ को चुनाव लड़ाने के लिए आरएसएस के मुख्यालय नागपुर से करीब सवा सौ किमी दूर छोटे से कस्बे छिंदवाड़ा लेकर आईं, तब यहां जीप भी नहीं मिलती थी। कमलनाथ ने एक जीप ढूंढकर चुनाव लड़ा था।

विज्ञापन


आज कमलनाथ को छिंदवाड़ा में चुनाव जीतते हुए 34 साल हो गए हैं और भाजपा को उनका कोई तोड़ नहीं मिला तो उसके कारण साफ दिखाई देते हैं। चमचमाती सड़कें और फ्लाईओवर्स देखकर आपको किसी महानगर में होने का भ्रम होने लगेगा।
विज्ञापन


विप्रो और इंफोसिस जैसी कंपनियां यहां कैंपस करती हैं। छिंदवाड़ा से तीन राजमार्ग गुजरते हैं। छह सेंट्रल स्कूल हैं। नागपुर से ब्राडगेज का काम चल रहा है। कई उद्योग कतार में हैं। कमलनाथ का कहना है कि वह एचीवमेंट की राजनीति नहीं करते, फुलफिलमेंट (लोगों की संतुष्टि) की राजनीति करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विवादों से भी रहा नाता

UPA will come on power again
कमलनाथ मानते हैं कि यूपीए बहुत सारी सीटें हारेगा और एनडीए काफी ज्यादा सीटें जीतेगा। लेकिन यूपीए सीटें हारने के बाद भी अंत में सरकार बनाने में सफल होगा। नरेंद्र मोदी सरकार बनाने में सफल नहीं हो पाएंगे।


कमलनाथ कहते हैं, ‘मोदी स्टेज की राजनीति कर रहे हैं। उनकी राजनीति मीडिया की राजनीति है। राहुल गांधी दिल की राजनीति करते हैं। भारत में दिल की राजनीति चलती है।’ छिंदवाड़ा ने कमलनाथ को एक झटका भी दिया है। वर्ष 1996 में हवाला कांड में कमलनाथ का नाम आया।

उनकी पत्नी अलकानाथ विजयी हुईं। बाद में जब उन्होंने इस्तीफा दिया और कमलनाथ ने चुनाव लड़ा तो भाजपा के सुंदरलाल पटवा के हाथों हार झेलनी पड़ी। पटवा छह महीने ही सीट पर काबिज रह सके।

भोपाल, इंदौर को टक्कर दे रहा छिंदवाड़ा

UPA will come on power again

वर्ष 1998 के चुनाव में कमलनाथ फिर जीत गए। पिछले विधानसभा चुनाव में महाकौशल में कमलनाथ खेमे के कई उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। कमलनाथ मानते हैं कि संगठन की कमजोरियों और देर से काम आरंभ करने की वजह से विधानसभा में खराब प्रदर्शन दिखाई दिया। गलतियों से सबक सीखा है और लोकसभा में बेहतर नतीजे की उम्मीद है।

कमलनाथ लंबे समय से केंद्र की राजनीति में हैं। पिछले दस साल में वह महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं। शायद इसीलिए छिंदवाड़ा में केंद्र सरकार की मदद से चलने वाले ऐसे कई संस्थान हैं जो भोपाल और इंदौर में भी नहीं हैं।

इन सब बातों ने कमलनाथ को तकरीबन अपराजेय बना दिया है। भाजपा ने उनके मुकाबले चौधरी चंद्रभान सिंह को उतारा है जो 1991 के बाद छिंदवाड़ा लौटे हैं। भाजपा मध्य प्रदेश में यदि 29 में से जिन दो सीटों को जीती हुई नहीं मानती उनमें से एक छिंदवाड़ा है। यह कमलनाथ के राजनीतिक जीवन की उपलब्धि है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed