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Umaria News: वन अधिकारियों की प्रशिक्षण कार्यशाला, गिद्धों की पहचान, गणना की वैज्ञानिक पद्धति की दी गई जानकारी
Fri, 31 Jan 2025 08:24 AM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2025 08:24 AM IST
सार
प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने डिवीजनों में गणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करेंगे। 17 से 19 फरवरी 2025 तक प्रदेशभर में गिद्ध गणना अभियान चलेगा, जिसके आंकड़े वन विहार नेशनल पार्क, भोपाल को भेजे जाएंगे।
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बांधवगढ़ में गिद्ध गणना हेतु प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 30 जनवरी 2025 को शहडोल वृत्त के प्रशिक्षकों के लिए गिद्ध गणना हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बीटीआर डिवीजन, उमरिया डिवीजन, अनुपपुर डिवीजन, उत्तर और दक्षिण शहडोल डिवीजन से लगभग 30 वन अधिकारियों ने प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य गिद्ध गणना की सटीकता बढ़ाना और प्रशिक्षकों को इस कार्य के लिए तैयार करना था।
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर की भूमिका दिलशेर खान ने निभाई। उन्होंने प्रशिक्षकों को गिद्धों की पहचान, गणना की वैज्ञानिक पद्धति और प्रपत्र भरने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस प्रशिक्षण के उपरांत, ये प्रशिक्षक अपने-अपने डिवीजनों में गिद्ध गणना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे और वनरक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रदेशभर में गिद्ध गणना 17 से 19 फरवरी 2025 तक आयोजित की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत बीट स्तर पर वनरक्षक गिद्धों की गणना करेंगे और निर्धारित प्रपत्र भरेंगे। इसके बाद ये आंकड़े रेंज स्तर पर संकलित किए जाएंगे और फिर डिवीजन कार्यालयों को भेजे जाएंगे। अंतिम रूप से सभी डिवीजनों से प्राप्त जानकारी को गिद्ध गणना के नोडल केंद्र, वन विहार नेशनल पार्क, भोपाल भेजा जाएगा।
गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वे मृत पशुओं का निपटान करके संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। गिद्धों की घटती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है, और इस तरह की गणनाएं उनकी स्थिति को समझने और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने में सहायक होती हैं।
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कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर की भूमिका दिलशेर खान ने निभाई। उन्होंने प्रशिक्षकों को गिद्धों की पहचान, गणना की वैज्ञानिक पद्धति और प्रपत्र भरने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस प्रशिक्षण के उपरांत, ये प्रशिक्षक अपने-अपने डिवीजनों में गिद्ध गणना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे और वनरक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रदेशभर में गिद्ध गणना 17 से 19 फरवरी 2025 तक आयोजित की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत बीट स्तर पर वनरक्षक गिद्धों की गणना करेंगे और निर्धारित प्रपत्र भरेंगे। इसके बाद ये आंकड़े रेंज स्तर पर संकलित किए जाएंगे और फिर डिवीजन कार्यालयों को भेजे जाएंगे। अंतिम रूप से सभी डिवीजनों से प्राप्त जानकारी को गिद्ध गणना के नोडल केंद्र, वन विहार नेशनल पार्क, भोपाल भेजा जाएगा।
गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वे मृत पशुओं का निपटान करके संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। गिद्धों की घटती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है, और इस तरह की गणनाएं उनकी स्थिति को समझने और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने में सहायक होती हैं।
