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EVM Hatao Loktantra Bachao: बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग, उमरिया में संयुक्त मोर्चा सौंपेगा ज्ञापन
Tue, 06 Feb 2024 09:42 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 06 Feb 2024 09:42 PM IST
सार
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठ रही है। ईवीएम हटाओ-लोकतंत्र बचाओ संयुक्त मोर्चा की मांग कर रहा है। ऐसे में संयुक्त मोर्चा की ओर से ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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संयुक्त मोर्चा पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ईवीएम हटाओ-लोकतंत्र बचाओ संयुक्त मोर्चा ने सरकार एवं चुनाव आयोग से मांग की है कि देश तथा राज्यों में आने वाले सभी चुनाव मत पत्रों के जरिए ही कराए जाएं। इस मांग को लेकर आठ फरवरी को कलेक्ट्रेट में एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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जानकारी देते हुए जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामसरोवर जायसवाल ने बताया कि विगत वर्ष 1999 से देश में ईवीएम से चुनाव शुरू हुआ था। पारदर्शिता का अभाव तथा संदेहास्पद परिणामों के चलते बुद्धजीवी, विपक्ष तथा विभिन्न राजनैतिक दल लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। आयोग का दावा है कि ईवीएम और वीवीपीएटी से किसी तरह की टेंपरिंग नहीं की जा सकती, न ही इसे नेट अथवा कम्प्यूटर से जोड़ा जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पृथ्वी से हजारों मील दूर चंद्रमा पर चंद्रयान को उतारा और नियंत्रित किया जा सकता है तो इस इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस में दर्ज डेटा को दूर बैठ कर प्रभावित क्यों नहीं किया जा सकता।
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आयोग को नहीं है जानकारी
वरिष्ठ अधिवक्ता रामसरोवर जायसवाल का आरोप है कि ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग या तो अनभिज्ञ है या वह भी लोकतंत्र की हत्या में सहभागी है। उन्होंने बताया कि ईवीएम पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसका निर्माण बैंगलूरू में होना बताया जा रहा है। निर्माण के उपरांत मोबाइल से लेकर हर इलेक्ट्रॉनिक आइटम में की गई जितनी प्रोग्रामिंग कम्पनियों द्वारा उपयोगकर्ताओं को बताई जाती है, वे उतना ही जानते हैं। ईवीएम में भी ऐसा ही है, इसमें कई ऐसे प्रोग्राम हैं, जिसे सरकार के कुछ लोग ही जानते हैं। उन्हीं की मिलीभगत से चुनाव के बाद वोटों मे धांधली की जा रही है।
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मतदाताओं को भी संशय
संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों का मानना है कि ईवीएम से मतदान को लेकर वोटर भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्हे लगता है कि मतदान के समय उनका मत वीवीपीएटी के जरिए दिखाई तो देता है, परंतु वह उसी उम्मीदवार के खाते में दर्ज होता भी है या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता। हाल में हुए मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों मे आए अप्रत्याशित परिणामों ने जनता के संदेह को और मजबूत किया है। संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष रामसरोवर जायसवाल का कहना है कि आजादी के बाद से 1999 तक देश में सभी आम चुनाव मत पत्रों के माध्यम से ही कराये गए। यदि कोई गड़बड़ी नहीं हो रही तो केन्द्रीय चुनाव आयोग और सत्तापक्ष को पुरानी पद्धति से चुनाव कराने में इतनी दिक्कत क्यों है। जायसवान ने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जिसमें संदेह हो, उसे तत्काल समाप्त कर देना चाहिए।
सभी दल और नागरिक शामिल हों
ईवीएम हटाओ-लोकतंत्र बचाओ संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामसरोवर जायसवाल ने कहा कि चुनाव मे हो रही धांधली के कारण संविधान और लोकतंत्र खतरे में है। यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाला समय और भी कष्टकारक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुहिम राजनैतिक नहीं, बल्कि देश को बचाने की है। इसमें सभी का सहयोग आवश्यक है। जायसवाल ने जिले के सभी विपक्षी दलों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों से इस अभियान में सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया है।
