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उलगुलान-एक क्रांति: बिरसा मुंडा पर बनी फीचर फिल्म का शिवराज ने किया डिजिटल रिलीज 

Sat, 13 Nov 2021 05:57 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 13 Nov 2021 05:57 PM IST
सार

यह फिल्म बिरसा मुंडा के भारत की आजादी, जनजातीय धर्म, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष पर केन्द्रित है।  
 

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Ulgulan-Ek Kranti: Shivraj digitally releases feature film on Birsa Munda
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बिरसा मुंडा पर बनी फिल्म का डिजिटल रिलीज करते हुए । - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को उलगुलान-एक क्रांति फीचर फिल्म को डिजिटली रिलीज किया। मुख्यमंत्री ने जनसंपर्क विभाग के पोर्टल पर इसे डिजिटली रिलीज किया गया। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध अभिनेता नितीश भारद्वाज, फिल्म के निर्माता, निर्देशक अशोक शरण, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाडे़ उपस्थित थे। अशोक शरण ने जनजातीय जीवन पर लगभग 200 लघु फिल्में बनाई हैं।  
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यह फिल्म भगवान बिरसा मुंडा के कर्म क्षेत्र खूंटी, झारखंड में शूट की गई है। मध्य प्रदेश पहला राज्य है, जो इस फिल्म को डिजिटली रिलीज कर रहा है। फिल्म के लेखक पद्म भूषण एवं पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा हैं। भारत की जनजातियों के लिए यह सम्मान की बात होगी कि वह इस फिल्म के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के जीवन को देख और समझ सकेंगे। 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा का जन्म दिवस पिछले वर्ष से प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ।
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1898 में की थी क्रांति
फिल्म के निर्माता-निर्देशक अशोक शरण ने बताया कि बिरसा मुंडा ने 24-25 दिसंबर 1898 को पहले उलगुलान यानी क्रान्ति की घोषणा की थी। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित फीचर फिल्म उलगुलान-एक क्रान्ति 35 एमएम सिनेमा स्कोप डॉल्बी डिजिटल साउंड में बनी है। फिल्म बॉलीवुड के प्रसिद्ध कलाकारों को लेकर बनाई गई है। मुंडा ने भारत की आजादी और जनजातीय धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी। 9 जनवरी 1899 को उनके नेतृत्व में सयिलरकब, खूंटी के पहाड़ों पर अंग्रेज़ों के साथ लड़ाई हुई थी। बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करने के लिए उस वक्त 500 रुपए का ईनाम रखा गया था। लालच में वहीं के सात लोगों ने जंगल में सोते हुए बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर अंग्रेजों को सौंप दिया था। 9 जून 1900 को इनकी मौत रांची सेंट्रल जेल में अंग्रेजों के जहर देने से हुई थी। बिरसा मुंडा 25 वर्ष की आयु भी पूरी नहीं कर पाए थे।  
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