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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain Traffic Relief 5.30-km Elevated Corridor Worth 945 Crore to be Ready Before Simhastha 2028

उज्जैन में खत्म होगा 'जाम का झाम': 945 करोड़ में बनेगा 5.30 किमी ब्रिज; सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य

Tue, 25 Aug 2026 12:50 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Tue, 25 Aug 2026 12:50 PM IST
सार

उज्जैन में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 945.20 करोड़ रुपये की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। यह इंद्रानगर-नीलगंगा और इंदौर गेट-निकास चौराहा क्षेत्रों को जोड़ेगा।

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Ujjain Traffic Relief 5.30-km Elevated Corridor Worth 945 Crore to be Ready Before Simhastha 2028
एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण जारी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उज्जैन की आगर रोड से इंदौर गेट के बीच गाड़ी चलाना यानी हर दिन की एक नई जंग है। तीन रेड सिग्नल, छह व्यस्त चौराहे और ऊपर से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मंडी व नगर निगम जाने वाली गाड़ियों की बेहिसाब भीड़। पुराने शहर की तंग गलियों और चामुंडा माता मंदिर के आसपास का यह वह इलाका है, जहां हर वक्त पहिए थमे नजर आते हैं, लेकिन अब उज्जैन के इस सबसे बड़े ट्रैफिक सिरदर्द का पक्का इलाज होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 945.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के भूमिपूजन के साथ ही शहर के विकास ने नई करवट ले ली है।
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जाम के जाल से सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर पर
यह एलिवेटेड ब्रिज इंद्रानगर चौराहे से नीलगंगा और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक बनेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि जमीन पर रेंगने वाली गाड़ियां अब बिना किसी लाल बत्ती या चौराहे पर रुके सीधे शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक फर्राटा भर सकेंगी। इससे न केवल यात्रा का समय आधा रह जाएगा, बल्कि रोजाना दफ्तर, स्टेशन या मंडी जाने वाले स्थानीय लोगों की जिंदगी भी आसान होगी।
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सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान
उज्जैन सिर्फ एक शहर नहीं, आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। महाकाल लोक बनने के बाद से यहां काल भैरव और मंगलनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट दोहरे फायदे लेकर आ रहा है। इस एलिवेटेड ब्रिज से पुराने शहर की घनी आबादी वाले इलाकों को राहत मिलेगी और वाहनों का दबाव कम होगा। वहीं, वर्ष 2028 के सिंहस्थ में जुटने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह रोड एक लाइफलाइन का काम करेगा, जिससे पूरा शहर चोक होने से बच जाएगा। यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि महाकाल की नगरी के आधुनिक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में नया अध्याय है, जो आने वाले कई दशकों तक शहर की तस्वीर बदल सकता है।
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अधिकारियों ने किया निरीक्षण
इंद्रानगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे के बीच बनाए जा रहे एलिवेटेड ब्रिज का विकास कार्य आखिर किस तरीके से चल रहा है और इसके निर्माण में किसी भी प्रकार की समस्या तो नहीं आ रही है, इसकी जानकारी लेने के लिए आज सुबह संभाग आयुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और अधिकारियों की टीम आगर रोड पहुंची।

गलतियों को सुधारने के दिशा-निर्देश दिए
यहां संभाग आयुक्त और कलेक्टर ने अधिकारियों से ब्रिज निर्माण की जानकारी लेने के साथ ही कुछ गलतियों को सुधारने के दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इंद्रानगर से नीलगंगा एलिवेटेड ब्रिज का काम शुरू हो चुका है, जबकि जल्द ही इंदौर गेट से निकास चौराहे के एलिवेटेड ब्रिज का काम भी शुरू होगा। सिंहस्थ से पहले इन दोनों ब्रिज का काम पूरा कर लिया जाएगा।
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