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Ujjain: फायर सेफ्टी जांच के बाद बढ़ा विवाद, कार्रवाई के दौरान हंगामा; आदिवासी परिवार ने लगाए भेदभाव के आरोप
Fri, 10 Jul 2026 09:38 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Fri, 10 Jul 2026 09:38 AM IST
सार
जयसिंहपुरा स्थित मां पीताम्बरा होटल रेजिडेंसी में कथित मारपीट की घटना के बाद नगर निगम की टीम जेसीबी, पोकलेन मशीन और भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई के लिए पहुंची, लेकिन आदिवासी महिलाओं के विरोध के चलते होटल को तोड़ने की कार्रवाई नहीं हो सकी और उसे सील कर दिया गया।
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फायर जांच से शुरू हुआ विवाद बना बड़ा बवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई आगजनी की घटनाओं के बाद नगर निगम की फायर सेफ्टी जांच अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। जयसिंहपुरा स्थित मां पीताम्बरा होटल रेजिडेंसी में जांच के दौरान अधिकारी से कथित मारपीट के बाद गुरुवार को नगर निगम की टीम जेसीबी, पोकलेन मशीन और भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई के लिए पहुंची। हालांकि, मौके पर मौजूद महिलाओं के विरोध के चलते होटल को तोड़ने की कार्रवाई नहीं हो सकी और निगम ने होटल को सील कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच होटल संचालक के परिवार ने आदिवासी होने के कारण प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाए हैं।
काली पट्टी बांधकर पहुंचे निगम कर्मचारी, होटल सील कर लौटे
बुधवार को प्रभारी फायर अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद साहू के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी थी। इसी के विरोध में गुरुवार को निगम का अमला हाथों पर काली पट्टी बांधकर कार्रवाई के लिए होटल पहुंचा। प्रशासन जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ होटल के कथित अवैध हिस्से को तोड़ने की तैयारी में था, लेकिन मौके पर मौजूद आदिवासी महिलाओं के विरोध के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी। काफी देर तक चले हंगामे के बाद नगर निगम की टीम ने होटल को सील किया और वापस लौट गई।
फायर अधिकारी से मारपीट के आरोप में होटल संचालक का बेटा जेल भेजा गया
नगर निगम के अनुसार, फायर सेफ्टी जांच के दौरान होटल संचालक मनोहरलाल अरोन्या के बेटे विकास अरोन्या ने प्रभारी फायर अधिकारी का परिचय पत्र छीन लिया, सरकारी वायरलेस सेट तोड़ दिया और उन्हें चार थप्पड़ मार दिए। घटना के बाद महाकाल थाना पुलिस ने विकास अरोन्या के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा समेत चार गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। कार्रवाई के दौरान महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे।
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ये भी पढ़ें- Umaria News: चित्रकूट जा रहे परिवार की खुशियां हाईवे पर बिखरीं, उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसे में चार की मौत
परिवार का आरोप- आदिवासी होने की वजह से किया जा रहा परेशान
होटल संचालक के परिवार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। नीलम अरोन्या का कहना है कि प्रभारी फायर अधिकारी बिना वैध परिचय पत्र दिखाए होटल में प्रवेश कर रहे थे। जब उनसे पहचान पत्र मांगा गया तो वे नाराज हो गए और आदिवासी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनका कहना है कि इसी बात पर विवाद हुआ। वहीं विजयलक्ष्मी अरोन्या ने आरोप लगाया कि आदिवासी होने की वजह से उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई नियमों के पालन से ज्यादा एक अधिकारी के अहं की वजह से की जा रही है।
अवैध निर्माण को लेकर भी उठे सवाल
नगर निगम का कहना है कि होटल का कुछ हिस्सा अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस पूरे मामले के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल पूछा जा रहा है कि यदि होटल में अवैध निर्माण था तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई और कार्रवाई केवल विवाद के बाद ही क्यों शुरू की गई।
दो पहलुओं में बंटा मामला
फिलहाल यह मामला दो अलग-अलग पहलुओं में देखा जा रहा है। एक ओर सरकारी अधिकारी के साथ कथित मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा का कानूनी मामला है, वहीं दूसरी ओर होटल संचालक का परिवार आदिवासी समाज के साथ भेदभाव और लक्षित कार्रवाई का आरोप लगा रहा है। अब यह मामला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसकी जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
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काली पट्टी बांधकर पहुंचे निगम कर्मचारी, होटल सील कर लौटे
बुधवार को प्रभारी फायर अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद साहू के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी थी। इसी के विरोध में गुरुवार को निगम का अमला हाथों पर काली पट्टी बांधकर कार्रवाई के लिए होटल पहुंचा। प्रशासन जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ होटल के कथित अवैध हिस्से को तोड़ने की तैयारी में था, लेकिन मौके पर मौजूद आदिवासी महिलाओं के विरोध के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी। काफी देर तक चले हंगामे के बाद नगर निगम की टीम ने होटल को सील किया और वापस लौट गई।
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फायर अधिकारी से मारपीट के आरोप में होटल संचालक का बेटा जेल भेजा गया
नगर निगम के अनुसार, फायर सेफ्टी जांच के दौरान होटल संचालक मनोहरलाल अरोन्या के बेटे विकास अरोन्या ने प्रभारी फायर अधिकारी का परिचय पत्र छीन लिया, सरकारी वायरलेस सेट तोड़ दिया और उन्हें चार थप्पड़ मार दिए। घटना के बाद महाकाल थाना पुलिस ने विकास अरोन्या के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा समेत चार गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। कार्रवाई के दौरान महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे।
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परिवार का आरोप- आदिवासी होने की वजह से किया जा रहा परेशान
होटल संचालक के परिवार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। नीलम अरोन्या का कहना है कि प्रभारी फायर अधिकारी बिना वैध परिचय पत्र दिखाए होटल में प्रवेश कर रहे थे। जब उनसे पहचान पत्र मांगा गया तो वे नाराज हो गए और आदिवासी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनका कहना है कि इसी बात पर विवाद हुआ। वहीं विजयलक्ष्मी अरोन्या ने आरोप लगाया कि आदिवासी होने की वजह से उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई नियमों के पालन से ज्यादा एक अधिकारी के अहं की वजह से की जा रही है।
अवैध निर्माण को लेकर भी उठे सवाल
नगर निगम का कहना है कि होटल का कुछ हिस्सा अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस पूरे मामले के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल पूछा जा रहा है कि यदि होटल में अवैध निर्माण था तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई और कार्रवाई केवल विवाद के बाद ही क्यों शुरू की गई।
दो पहलुओं में बंटा मामला
फिलहाल यह मामला दो अलग-अलग पहलुओं में देखा जा रहा है। एक ओर सरकारी अधिकारी के साथ कथित मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा का कानूनी मामला है, वहीं दूसरी ओर होटल संचालक का परिवार आदिवासी समाज के साथ भेदभाव और लक्षित कार्रवाई का आरोप लगा रहा है। अब यह मामला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसकी जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
