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Ujjain: सीएम यादव समतामूर्ति अलंकरण सम्मान से सम्मानित, कहा- भारत विश्व का सबसे बड़ा और गौरवशाली लोकतंत्र

Sun, 15 Sep 2024 02:58 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उदित दीक्षित Updated Sun, 15 Sep 2024 02:58 PM IST
सार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 12 वर्षों में आयोजित होने वाले सिंहस्थ की छटा निराली होती है। समारोह में उपस्थित देवतुल्य धर्माचार्यों के दर्शन से परमात्मा की अनुभूति हो रही है। स्वामी श्री रामानुज जी महाराज ने अपने अलौकिक दर्शन से सनातन धर्म के संरक्षण के साथ मानव से मानव को जोड़कर जनसेवा का मार्ग भी दिखाया है।  

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Ujjain: Madhya Pradesh CM Mohan Yadav honored with Samtamurti Alankaran Samman
सीएम का किया गया सम्मान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका अनंत है। यह नगरी हर काल और हर युग में अपने गुणों, कीर्ति और प्रसिद्धि से सदैव अलंकृत होती आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और गौरवशाली लोकतंत्र है, जिसके तीन आधार स्तंभों में न्यायपालिका प्रमुख आधार स्तंभ है, जो महाराजा विक्रमादित्य की न्यायप्रियता के समान हमारी ताकत को कई गुना बढ़ाती है। महाराजा विक्रमादित्य की न्याय और समानता से प्रेरित मध्य प्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए कृत संकल्पित है। 

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रविवार को उज्जैन के रामानुज कोट आश्रम में समतामूर्ति अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी को रामानुज कोट के धर्माचार्य संत स्वामी गादी जी महाराज द्वारा समतामूर्ति अलंकरण से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी श्री रंगनाथाचार्य महाराज सहित अन्य संत आचार्य भी उपस्थित थे। 
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निराली होती है सिंहस्थ की छटा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर 12 वर्षों में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ की छटा निराली होती है। समारोह में उपस्थित देवतुल्य धर्माचार्यों के दर्शन से परमात्मा की अनुभूति हो रही है। स्वामी श्री रामानुज जी महाराज ने अपने अलौकिक दर्शन से सनातन धर्म के संरक्षण के साथ मानव से मानव को जोड़कर जनसेवा का मार्ग भी दिखाया है। समाज में आने वाली विभिन्न चुनौतियों के बावजूद स्वामी जी द्वारा भक्ति मार्ग का निरंतर प्रसार किया गया, जिसकी अविरल धारा आज भी प्रवाहित हो रही है।
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समानता वेद-पुराणों के साथ संविधान में भी रेखांकित : जस्टिस माहेश्वरी
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जेके माहेश्वरी ने कहा कि समानता हमारे सनातन संस्कृति में वेद-पुराणों के साथ हमारे संविधान में भी उल्लेखित है। भारत के संविधान में समानता का अधिकार मानव को प्राप्त पहला अधिकार है। ईश्वर का समभाव भी सभी के लिए समान है। अगर कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण पद पर आसीन होता है तो वहां बिना देवीय कृपा के संभव नहीं है। ईश्वर ने उसे जनहित के लिए चुना है। इसीलिए उसे सदैव मानव सेवा के कार्य में संलग्न रहना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीठाधीश्वर स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज सहित अन्य धर्माचार्यों को पुष्पमाला और अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित भी किया।

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